डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पड़रिया खुर्द के आंगनवाड़ी एवं मिनी आंगनवाड़ी केंद्रों में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि केंद्रों के संचालन में लंबे समय से लापरवाही बरती जा रही है, जिससे बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मामले में पहले की गई जांच पर भी सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने अब निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) शहपुरा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि आंगनवाड़ी केंद्र निर्धारित समय पर नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहे हैं। आरोप है कि कई दिनों तक बच्चों को भोजन उपलब्ध नहीं कराया गया, जबकि भोजन मिलने पर भी शासन द्वारा तय मेन्यू के अनुसार पौष्टिक आहार देने के बजाय निम्न गुणवत्ता का भोजन परोसा गया। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बच्चों को केवल सूखे आम के टुकड़े (अमकरिया) डालकर भोजन दिया गया, जो पोषण मानकों के अनुरूप नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन अनियमितताओं की जानकारी पहले भी प्रशासन और संबंधित विभाग को दी गई थी। मीडिया के माध्यम से मामला सामने आने के बाद विभागीय जांच तो कराई गई, लेकिन जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि जांच के दौरान वास्तविक हितग्राहियों और शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज करने के बजाय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के रिश्तेदारों और परिचितों के बयान लिए गए, जिससे पूरी जांच की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आ गई।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित मेन्यू के अनुसार नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण पोषण आहार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि पूर्व में हुई जांच की समीक्षा कर वास्तविक हितग्राहियों और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जाएं तथा यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो संबंधित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई तो बच्चों के भविष्य और उनके पोषण से जुड़ी योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित होगा। ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर डिंडौरी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विभाग अपना पक्ष प्रस्तुत करता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।









