डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी, दीपावली के पावन पर्व पर जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया का एक अलग ही रूप सामने आया। भारी-भरकम लाव-लस्कर और वीआईपी संस्कृति से दूर, कलेक्टर साहिबा खुद आम खरीदार की तरह डिंडौरी के स्थानीय बाजारों की गलियों में पैदल उतर पड़ीं।
शनिवार का दिन डिंडौरी बाजार के छोटे दुकानदारों और माटी कला से जुड़े कुम्हारों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। बाजार का औचक भ्रमण करते हुए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया सीधे उन ठेले-पटरियों और सड़क किनारे बैठे छोटे व्यापारियों के पास पहुँचीं, जिनकी दीवाली ग्राहकों की राह देखते-देखते वीरान हो जाती है।

कलेक्टर ने स्थानीय शिल्पकारों की गगरी और हाथों से रचे गए मिट्टी के दीयों को बड़े चाव से खरीदा। इस दौरान उन्होंने केवल खरीदारी ही नहीं की, बल्कि दुकानदारों के पास बैठकर उनके कारोबार का हाल-चाल जाना और उनकी समस्याओं को बड़े ध्यान से सुना। कलेक्टर को अपने बीच पाकर साधारण दुकानदारों के चेहरे खिल उठे और उनका उत्साह कई गुना बढ़ गया।
बाजार भ्रमण के दौरान कलेक्टर भदौरिया ने डिंडौरी की जनता को एक बेहद प्रासंगिक और प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि
"दीपावली का असली आनंद तभी है जब हमारे साथ-साथ समाज के उन तबके के चेहरों पर भी मुस्कान आए जो इस पर्व को अपने हुनर से रौशन करते हैं। चीनी लाइट्स या ऑनलाइन उत्पादों के बजाय हमारे स्थानीय कुम्हारों, बुनकरों और छोटे दुकानदारों के बनाए उत्पादों को प्राथमिकता देना ही सच्ची 'वोकल फॉर लोकल' की भावना है।"

प्रशासनिक मुखिया का यह संबल देख बाजार में मौजूद अन्य लोगों ने भी खुलकर स्थानीय उत्पादों की खरीदारी की, जिससे छोटे व्यापारियों के भीतर एक नई उम्मीद जगी है। कलेक्टर की इस अनूठी पहल के दौरान उनके साथ जिले का पूरा प्रशासनिक अमला भी कदमताल करता नजर आया।









