झाबुआ/खबर डिजिटल/ कुलदीप खराड़ीया/ झाबुआ जिले के राणापुर क्षेत्र के चुई गांव स्थित बाबा देव की पहाड़ी पर निभाई जाने वाली पाड़ा परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध लोक संस्कृति, आस्था और पूर्वजों की अनमोल विरासत का प्रतीक है।
आधुनिक दौर में भले ही मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने के लिए विज्ञान के पास अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध है, लेकिन आदिवासी समाज आज भी अपनी सदियों पुरानी परंपराओं और मान्यताओं को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ संजोए हुए है। इस परंपरा के माध्यम से ग्रामीण आने वाले वर्ष में बारिश और खेती-किसानी को लेकर अपने पारंपरिक अनुमान लगाते हैं।
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बदलते समय के साथ जहां कई लोक परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं, वहीं चुई गांव की यह अनूठी परंपरा आज भी हजारों ग्रामीणों को एक साथ जोड़ती है।
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि नई पीढ़ी भी अपने पूर्वजों की इस सांस्कृतिक विरासत से जुड़ रही है। निश्चित ही, ऐसी परंपराएं हमारी लोक संस्कृति की पहचान हैं और इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सहेजकर पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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