खबर digital news रिपोर्टर /कटनी, 12 जुलाई-- मानसून की दस्तक के साथ ही कटनी जिले में सर्पदंश (सांप के काटने) की घटनाओं में तेजी आने लगी है। खेतों, घरों के आसपास, घास-फूस के ढेर, झाड़ियों और जलभराव वाले इलाकों में सांपों की सक्रियता बढ़ने से खतरा भी बढ़ गया है। इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने और सर्पदंश की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचने की सख्त सलाह दी है।स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि आज भी कई लोग सांप के काटने के बाद मरीज को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र, ओझा-गुनिया या पंडा-पुजारी के पास ले जाते हैं। इस दौरान उपचार में होने वाली देरी मरीज की जान पर भारी पड़ सकती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्पदंश का एकमात्र वैज्ञानिक और प्रमाणित उपचार एंटी स्नेक वेनम (ASV) है, जो केवल अस्पताल में उपलब्ध होता है।विशेषज्ञों के अनुसार सर्पदंश के बाद शुरुआती समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि मरीज को बिना देरी के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो अधिकांश मामलों में उसकी जान बचाई जा सकती है। इसलिए किसी भी तरह के अंधविश्वास या घरेलू उपचार पर भरोसा करने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से बारिश के मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की भी अपील की है। खेतों में काम करते समय मजबूत जूते पहनें, रात में टॉर्च का उपयोग करें, घर और आसपास झाड़-झंखाड़ तथा घास-फूस की सफाई रखें और बच्चों को भी सांपों से बचाव के प्रति जागरूक करें।
स्वास्थ्य विभाग का संदेश साफ है—"सांप के काटने पर झाड़-फूंक नहीं, अस्पताल ही जाएं। समय पर मिला एंटी स्नेक वेनम ही मरीज की जान बचा सकता है।
कटनी से सौरभ श्रीवास्तव खबर डिजिटल संवाददाता कटनी









