सिवनी/खबर डिजिटल/राकेश यादव/ मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के बंडोल वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ड्यूटी और जेओनारा गांव के बीच के जंगलों से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। जहां एक तरफ सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ बंडोल वन विभाग की नाक के नीचे हरे-भरे जंगलों को बेरहमी से उजाड़ा जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस महाविनाश को देखने के बाद भी जिम्मेदार वन अमला पूरी तरह मौन साधे बैठा है।
सैकड़ों झाड़-पेड़ काटकर जमीन समतल, कृषि कार्य की तैयारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ड्यूटी और जेओनारा गांव के बीच स्थित वन विभाग की बेशकीमती भूमि पर भू-माफिया और अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। यहाँ धड़ल्ले से अवैध कटाई को अंजाम देते हुए सैकड़ों झाड़ों और पेड़ों को साफ कर दिया गया है। वन भूमि को पूरी तरह समतल कर उसे कृषि (खेती) योग्य बनाया जा रहा है, ताकि उस पर अवैध रूप से कब्जा किया जा सके।
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आखिर क्यों मौन है बंडोल वन अमला?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इतनी बड़ी तादाद में पेड़ों की कटाई और जमीन पर कब्जा बिना विभागीय सांठगांठ या घोर लापरवाही के मुमकिन नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी इस तरह की अवैध गतिविधियां होती हैं, विभाग को भनक तक नहीं लगती या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली जाती हैं। वन विभाग का यह रवैया उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार अधिकारी और मैदानी अमला 'कुंभकरणी नींद' सो रहा है, जिसे न तो सरकारी संपत्ति के नुकसान की परवाह है और न ही पर्यावरण की।
कलेक्टर की कार्रवाई पर टिकीं सबकी नजरें
इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद अब पूरे क्षेत्र की जनता और पर्यावरण प्रेमियों की नजरें सिवनी की संवेदनशील जिला कलेक्टर नेहा मीना पर टिक गई हैं। अब देखना यह होगा कि क्या जिला कलेक्टर इस बेलगाम हो चुके वन परिक्षेत्र के मामले को संज्ञान में लेती हैं? और क्या इस अवैध कटाई के पीछे शामिल दोषियों के साथ-साथ, अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले वन विभाग के कुंभकरणी अधिकारियों पर गाज गिरेगी?
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