श्योपुर/ खबर डिजिटल/ पिछले करीब 1 महीने से बजरी की सप्लाई बंद होने से जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक निर्माण कार्य रुक गए है, स्थिति यह है कि, पुलिस लाइन रोड पर बनाए जा रहे एसपी ऑफिस से लेकर नए रेस्ट हाउस और ग्रामीण इलाकों में गरीबों के लिए स्वीकृत हुए प्रधानमंत्री आवास का काम रुका पड़ा है, इन हालातो में आम लोगों को तो परेशानी उठानी पड़ ही रही है साथ ही मजदूरों को मजदूरी के लाले पड़ने लगे हैं, अगर यही हालात रहे तो जिले के हजारों मजदूरों को पलायन तक करना पड़ेगा.
गौरतलब है कि, जिले में रेत की एक भी वैध खदान नहीं है, सीमावर्ती राजस्थान राज्य की सरकार ने भी कुछ दिन पहले राजस्थान की कई रेत खदानों की लीज को निरस्त कर दिया है, जिले के नदी नालों से भी रेत का उत्खनन और परिवहन पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने पूरी तरह से रोक दिया है, अब निर्माण कार्य रुके पड़े हैं, लोग पहले से तीन गुना ज्यादा कीमत पर रेत खरीद कर निर्माण करने को तैयार है लेकिन, कहीं से भी रेत सप्लाई नहीं हो पा रही है, इस वजह से मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल पा रही है और भवन निर्माण कराने वाले ठेकेदार भी परेशान हैं. इसे लेकर अब हर तरफ से मांग उठ रही है कि, लोगों को रियायती दामों पर रेत उपलब्ध हो सके इसके लिए प्रशासन और पुलिस को कोई कारगर कदम उठाने चाहिए.
प्रभारी मंत्री के सामने भी स्थानी जनप्रतिनिधियों ने उठाया था मुद्दा
पिछले दिनों जिले के दौरे पर आए प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला के सामने भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने और अन्य लोगों ने रेत की सप्लाई शुरू कराने का मुद्दा उठाया था, कब लगा था कि, शायद एक-दो दिन में रेत सप्लाई शुरू हो जाएगी लेकिन, जिले के एसपी सुधीर कुमार अग्रवाल और कलेक्टर अर्पित वर्मा की सख़्ती की वजह से जनप्रतिनिधियों की मांग के बाद भी रेत की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है,
जिलेभर में सैकड़ो प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण रुका
भवन निर्माण करने के लिए बजरी बेहद आवश्यक होती है, लेकिन, बजरी की सप्लाई बंद हो जाने की वजह से चारों तरफ निर्माण कार्य रुक गए हैं सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण इलाकों में गरीब तबके के लोगों को उठानी पड़ रही है क्योंकि, उनके आवाज तो मंजूर हो गए हैं लेकिन, बजरी सप्लाई बंद होने की वजह से आवासों का निर्माण नहीं हो पा रहा है.
रंजीत माहौर निजी बिल्डिंग ठेकेदार श्योपुर ने बताया कि पिछले महीने भर से भी ज्यादा समय से रेत की सप्लाई पूरी तरह से बंद है, ऐसे में हम बिल्डिंग का निर्माण नहीं कर पा रहे, हमारा पैसा अटका हुआ है, मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल पा रही बहुत परेशानी आ रही है, अगर यही स्थिति रही तो हमें तो पलायन करना पड़ेगा।
काडू आदिवासी
कलमी का सहराना, जिला श्योपुर ने बताया कि रेत नहीं आ रही है इस वजह से जिले में कोई भी काम नहीं हो पा रहे, हम मजदूरी की तलाश में रोजाना शहर आते हैं लेकिन, काम ही नहीं चल रहे इस वजह से हमें कोई मजदूरी नहीं देता, उधार लेकर कहां तक काम चलाएं, दो-चार दिन में रेत सप्लाई शुरू नहीं हुई तो हम पलायन करके राजस्थान चले जाएंगे।









