डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ जनपद पंचायत डिंडोरी के अंतर्गत ग्राम पंचायत चटुआ से भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ राज्य वित्त आयोग के बजट से करीब ₹25 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से बनाए जा रहे सामुदायिक भवन की छत ढलाई के दौरान अचानक भरभराकर जमींदोज हो गई। हादसे में काम कर रहे दो मजदूर मलबे में दबकर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और कलेक्टर ने दोषी उपयंत्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार की रात करीब 7:30 बजे भवन की छत की ढलाई का काम बड़े पैमाने पर चल रहा था। लगभग 25 मजदूर कंक्रीट डालने के काम में जुटे हुए थे। इसी बीच अचानक एक जोरदार आवाज के साथ एक कमरे की पूरी छत नीचे गिर गई। छत गिरते ही मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। अधिकांश मजदूरों ने भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन दो मजदूर मलबे की चपेट में आ गए।
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हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने सूझबूझ और तत्परता दिखाते हुए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे दोनों मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें से एक मजदूर को गंभीर अंदरूनी चोटें आई हैं, जिसे तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका उपचार जारी है। वहीं दूसरे मजदूर को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस भी मौके पर पहुँची और मामले की जाँच शुरू की।
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नियमों के मुताबिक यह कार्य ग्राम पंचायत को खुद कराना था, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से इसे किसी निजी ठेकेदार को सौंप दिया गया। ठेकेदार दूसरी पंचायतों से मजदूरों को लाकर काम करवा रहा था।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में तकनीकी मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई। कंक्रीट की ढलाई तय मोटाई से कहीं अधिक कर दी गई थी, जिसके अतिरिक्त भार को कमजोर ढांचा संभाल नहीं सका और पूरी छत ढह गई। सामग्री की घटिया गुणवत्ता को लेकर भी लोगों में भारी आक्रोश है।
मामले में सबसे शर्मनाक भूमिका संबंधित उपयंत्री फिरोज़ खान की रही। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब यह हादसा हुआ तब उपयंत्री मौके पर ही मौजूद थे। लेकिन घायलों की मदद करने और उन्हें अस्पताल पहुँचाने के बजाय वे जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर मौके से फरार हो गए। उपयंत्री की इस संवेदनहीनता को लेकर ग्रामीणों में गहरा गुस्सा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डिंडोरी की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि निर्माण कार्य में तकनीकी लापरवाही और घटिया सामग्री का उपयोग साफ नजर आ रहा है।
कलेक्टर ने कहा कि "मामला हमारे संज्ञान में आया है। निर्माणाधीन भवन की छत गिरने से मजदूरों के घायल होने की सूचना मिली है। निश्चित रूप से कार्य में घोर लापरवाही बरती गई है। संबंधित उपयंत्री मौके पर मौजूद थे, जिन्हें तकनीकी मानकों की देखरेख करनी थी। इस गंभीर लापरवाही के लिए उपयंत्री के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।"
जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने भी मामले की बारीकी से जाँच के लिए सहायक यंत्री को मौके पर भेजा है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ एफआईआर सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।









