रीवा/खबर डिजिटल/ अरविन्द तिवारी / रीवा जिले के सिरमौर विधानसभा क्षेत्र के रोजौही-क्यौटी क्षेत्र में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना Rewa Nuclear Power Project को लेकर स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों का विरोध तेज हो गया है। परियोजना के संभावित पर्यावरणीय, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को लेकर चिंतित नागरिकों ने प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन संभाग आयुक्त रीवा के माध्यम से भेजा है। ज्ञापन में परियोजना पर पुनर्विचार, पारदर्शी जनसुनवाई और स्वतंत्र पर्यावरणीय अध्ययन की मांग की गई है।
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सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि क्षेत्र के विकास का विरोध नहीं है, लेकिन घनी आबादी और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाने से कई गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि प्रस्तावित स्थल के आसपास बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी निवास करती है, ऐसे में किसी भी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी या आपदा की स्थिति में व्यापक जनहानि और पर्यावरणीय नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ज्ञापन में जल संकट को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया है। नागरिकों का कहना है कि विंध्य क्षेत्र पहले से ही गर्मी के मौसम में पेयजल और सिंचाई जल की कमी का सामना करता है।
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परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन में बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, जिससे स्थानीय जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और कृषि व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। विरोधकर्ताओं ने क्यौटी जलप्रपात और आसपास के पर्यावरणीय क्षेत्र के संरक्षण का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि क्यौटी जलप्रपात रीवा की प्राकृतिक धरोहर और प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल है। बड़े औद्योगिक प्रकल्प के कारण क्षेत्र की जैव विविधता, पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ज्ञापन में चेर्नोबिल, फुकुशिमा, थ्री माइल आइलैंड और टोकाइमुरा जैसी विश्व की प्रमुख परमाणु दुर्घटनाओं का उल्लेख करते हुए परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े जोखिमों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि कई देशों ने परमाणु ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करने अथवा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए हैं। ज्ञापन में मांग की गई है कि परियोजना से संबंधित सभी वैधानिक प्रक्रियाएं, पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्ट और अन्य तकनीकी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं। प्रभावित गांवों में व्यापक जनसुनवाई आयोजित कर स्थानीय लोगों की राय ली जाए तथा सौर और अन्य हरित ऊर्जा विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
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परियोजना को लेकर क्षेत्र में बढ़ती चर्चाओं के बीच यह मुद्दा अब जनसुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और विकास के संतुलन से जुड़ी महत्वपूर्ण बहस का विषय बन गया है। स्थानीय नागरिकों ने सरकार से जनभावनाओं और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की मांग की है।









