डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी, अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने, शिकायत पेटियों में अर्जी डालने और फाइलों में धूल फांकते आवेदनों का दौर खत्म होने जा रहा है। डिंडौरी जिला प्रशासन एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जो पूरे मध्य प्रदेश के लिए नजीर बनने वाला है। पवित्र नर्मदा के तट पर जल्द ही एक ऐसी 'जन चौपाल' सजने वाली है, जहाँ सिर्फ समस्याओं का रोना नहीं रोया जाएगा, बल्कि शहर की तकदीर बदलने का खाका खुद शहर की जनता तय करेगी।
15 वार्ड, एक मंच और सीधा संवाद
नगर परिषद डिंडौरी के सभी 15 वार्डों के नागरिक, जनप्रतिनिधि और आला प्रशासनिक अधिकारी एक ही जगह, एक साथ बैठकर शहर की नब्ज टटोलेंगे। यह चौपाल केवल शिकायतें सुनने का सरकारी औपचारिकता वाला मंच नहीं होगा, बल्कि जनता से सीधे सवाल होगा— "समस्या आपकी है, तो बताइए इसका सबसे सटीक और व्यावहारिक समाधान क्या हो सकता है?"
इन बड़े मुद्दों पर आर-पार की बात:
साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन: शहर को वाकई सुंदर बनाने की जमीनी रणनीति।
पेयजल आपूर्ति: हर घर तक शुद्ध पानी पहुँचाने की व्यावहारिक योजना।
सड़क, नाली व स्ट्रीट लाइट: कागजी दावों से अलग धरातल पर सुधार।
यातायात व्यवस्था: जाम से मुक्ति और व्यवस्थित शहर का रोडमैप।
फाइलों का खेल खत्म, धरातल पर एक्शन प्लान
प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि बंद कमरों में एसी की हवा खाते हुए टेबल पर बनाई गई योजनाएं अक्सर नाकाम हो जाती हैं। असली समाधान वही है जो ज़मीन पर रहने वाले लोगों की राय से निकले।
जन चौपाल में नागरिकों द्वारा दिए गए हर सुझाव को बाकायदा दर्ज किया जाएगा। इसके तुरंत बाद एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिस पर अधिकारियों को तय सीमा के भीतर काम करना ही होगा। यानी, अब जनता केवल शिकायतकर्ता नहीं, बल्कि शासन की भागीदार बनेगी।
मध्य प्रदेश में पहली बार ऐसा प्रयोग!
यह 'सहभागी मॉडल' मध्य प्रदेश में अपनी तरह का पहला और अनोखा प्रयोग माना जा रहा है। यदि डिंडौरी का यह नवाचार सफल रहता है, तो प्रदेश के अन्य शहरों में भी प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के लिए इसी मॉडल को अपनाया जाएगा।
कलेक्टर का कड़ा और स्पष्ट संदेश:
"प्रशासन की ओर से यह एक नई और पारदर्शी शुरुआत है। जब नागरिक, जनप्रतिनिधि और अधिकारी एक साथ बैठकर मंथन करेंगे, तो कोई भी समस्या ऐसी नहीं बचेगी जिसका स्थायी समाधान न निकले।" - अंजू पवन भदौरिया, कलेक्टर (डिंडौरी)









