भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में दिव्यांगों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए शुरू की गई विशिष्ट दिव्यांगता पहचान (UDID) परियोजना की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। संसद में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में दिव्यांग व्यक्ति को वैध दिव्यांगता पहचान पत्र या प्रमाण पत्र हासिल करने में औसतन 253 दिन यानी करीब साढ़े आठ महीने लग रहे हैं। लंबी प्रक्रिया के कारण दिव्यांगों को पेंशन, शिक्षा, रोजगार और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहचान पत्र बनने में देरी उनके लिए प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ मानसिक परेशानी का कारण भी बन रही है।
12,213 आवेदन छह महीने से ज्यादा समय से लंबित
राज्यसभा में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा की ओर से दिए गए जवाब में मध्य प्रदेश की स्थिति सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 12,213 आवेदन ऐसे हैं, जो छह महीने से अधिक समय से लंबित हैं। वहीं, तीन महीने से ज्यादा समय से अटके आवेदनों की संख्या 14,288 बताई गई है। वर्ष 2021 से लेकर 5 अगस्त 2026 तक मध्य प्रदेश से UDID कार्ड के लिए कुल 4,58,156 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 4,02,819 कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जबकि 16,396 आवेदन खारिज किए गए हैं। इसके बावजूद पोर्टल पर 18,510 मामले अलग-अलग चरणों में लंबित हैं।
दिव्यांगों के लिए बढ़ रही परेशानी
UDID कार्ड दिव्यांग लोगों के लिए महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेज है। इसके जरिए उन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में मदद मिलती है। ऐसे में आवेदन प्रक्रिया में महीनों की देरी सीधे तौर पर लाभार्थियों को प्रभावित करती है। दिव्यांगों को प्रमाण पत्र और पहचान पत्र के लिए मेडिकल बोर्ड की जांच समेत कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। यदि किसी स्तर पर आवेदन लंबित हो जाता है तो पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है।
देशभर में भी लाखों आवेदन अटके
यह समस्या सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में 5.93 लाख से ज्यादा आवेदन छह महीने से अधिक समय से लंबित हैं। इससे स्पष्ट है कि UDID कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में कई राज्यों में सुधार की जरूरत है। संसद में जिला चिकित्सा बोर्ड की बैठकों में देरी को लेकर भी सवाल उठाया गया। सरकार ने बताया कि इन बैठकों का समय और उनकी संख्या संबंधित राज्य सरकार, अस्पतालों की स्थानीय जरूरतों और डॉक्टरों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। केंद्र की ओर से सभी राज्यों के लिए बैठकों की कोई एक समान आवृत्ति निर्धारित नहीं की गई है।
पोर्टल अपग्रेड और डॉक्टरों की ट्रेनिंग पर जोर
केंद्र सरकार ने प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें UDID पोर्टल को अपग्रेड करना, डेटाबेस को आधार से जोड़ना और चिकित्सा अधिकारियों व डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण देना शामिल है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में 253 दिनों का औसत प्रसंस्करण समय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। दिव्यांग हितों से जुड़े लोगों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल और तेज करना है।
अपील - खबर अच्छी लगने पर शेयर जरुर करें।









