भोपाल। मध्यप्रदेश में यूनिफाइड सिविल कोड (UCC) लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। यूसीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर सुझाव, दावे और आपत्तियां देने का सोमवार को आखिरी दिन है। भोपाल के नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी में आज शाम 6 बजे तक इस विषय पर चर्चा होगी। ड्राफ्टिंग कमेटी की अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई आम लोगों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से सीधे चर्चा करेंगी।
सामाजिक और धार्मिक संगठन भी रखेंगे अपनी बात
यूसीसी ड्राफ्ट पर चर्चा के लिए कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों को भी आमंत्रित किया गया है। आम नागरिकों के साथ-साथ अलग-अलग समाजों के प्रतिनिधि अपनी राय और सुझाव दे सकेंगे। कमेटी का उद्देश्य सभी वर्गों की राय लेकर अंतिम ड्राफ्ट तैयार करना है।
आयोगों और विभागों के प्रतिनिधि भी होंगे शामिल
महिला आयोग, बाल आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, जनजाति आयोग, ओबीसी आयोग, अल्पसंख्यक कल्याण आयोग समेत कई आयोगों के प्रतिनिधि भी बैठक में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा महिला एवं बाल विकास, गृह विभाग, अनुसूचित जाति-जनजाति विभाग और ओबीसी व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग अपने-अपने सुझाव और प्रस्तुतीकरण देंगे।
लिव-इन महिलाओं को मिल सकता है भरण-पोषण का अधिकार
प्रस्तावित यूसीसी ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। यदि किसी महिला का लिव-इन संबंध खत्म हो जाता है तो वह अपने साथी से भरण-पोषण की मांग कर सकती है। साथ ही ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को कानूनी पहचान और पैतृक संपत्ति में अधिकार देने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
महिलाओं को मिलेंगे समान अधिकार
प्रस्तावित यूसीसी के तहत महिलाओं को संपत्ति और उत्तराधिकार में बराबरी का अधिकार देने की बात कही गई है। इसके अलावा विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन हो सकता है जरूरी
ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने पर भी विचार किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।
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