डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ मध्यप्रदेश के कई जिलों में मिड-डे मील के अंतर्गत सेवाएं महिला स्व-सहायता समूहों और रसोइयों का महीनों से लंबित मानदेय और लागत राशि का भुगतान न होने से नाराज सैकड़ों महिलाओं ने डिंडौरी जिला पंचायत कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन करते हुए मुख्य द्वार का घेराव किया।
महिलाओं का आरोप है कि बीते कई महीनों से मानदेय और लागत राशि का भुगतान नहीं मिल रहा है। जिससे अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अधिकारियों की अनुपस्थिति और सुनवाई न होने के कारण महिलाओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं होता, वे अपना विरोध जारी रखेंगी।
3 साल की बकाया राशि का भी भुगतान अटका
खबर डिजिटल के डिंडौरी संवाददाता को प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया कि पीएम पोषण योजना के तहत काम करने वाले स्व-सहायता समूहों को जुलाई, अगस्त और सितंबर माह की लागत राशि नहीं मिली है। इसके साथ ही रसोइया बहनों को भी इन महीनों का मानदेय जारी नहीं किया गया है। आर्थिक तंगी के बावजूद समूह अपनी जेब से पैसे लगाकर बच्चों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं, लेकिन अब उनके सामने भी बजट का संकट खड़ा हो गया है।
इतना ही नहीं, महिलाओं ने यह भी उजागर किया कि वर्ष 2024, 2025 और 2026 के जून महीने की 15-15 दिनों की बकाया राशि का भुगतान भी अब तक लंबित पड़ा हुआ है। प्रादेशिक स्तर पर करीब 2.32 लाख रसोइया बहनें इस भुगतान में हो रही देरी से सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं।

पूर्व में भी कलेक्टर कार्यालय में लगाई थी गुहार
महिलाओं का कहना है कि अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए वे इससे पहले 8 सितंबर और 15 सितंबर को भी कलेक्टर कार्यालय पहुंच कर अपनी समस्या से जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत करा चुकी हैं। हालांकि, बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, जिसके चलते उन्हें मजबूरन जिला पंचायत कार्यालय का रुख करना पड़ा।
प्रमुख मांगें और मुद्दे
पिछले तीन वर्षों के जून माह के 15-15 दिनों की लंबित राशि और हालिया महीनों का मानदेय तुरंत खातों में ट्रांसफर किया जाए।
पीएम पोषण योजना के तहत प्रति विद्यार्थी लागत राशि को ₹20 से बढ़ाकर ₹25 किया जाए।
रसोइया बहनों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए तथा उन्हें बीमा एवं पेंशन सुविधा का लाभ दिया जाए।
स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष और सचिव के लिए नियमित मानदेय तय किया जाए।
पोर्टल पर दर्ज वास्तविक छात्र संख्या के अनुसार राशन और राशि आवंटित की जाए। इसके अलावा खाद्यान्न की आपूर्ति में हो रही कटौती को रोककर 52 किलो की बोरी में पूरा 52 किलो राशन दिया जाए (फिलहाल बोरियों में केवल 45 से 48 किलो ही राशन मिल रहा है)
महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उच्च अधिकारियों द्वारा इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर उनकी लंबित राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो वे अपने इस आंदोलन को और व्यापक रूप देने के लिए बाध्य होंगी।









