मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कई मायनों में खास हो सकते हैं. राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी तैयारियों को अभी से तेज कर दिया है. आयोग ऐसी व्यवस्था तैयार करने में जुटा है, जिसके लागू होने पर पंचायत स्तर तक मतदान प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा.
सबसे बड़ा बदलाव पंच और सरपंच के चुनाव को लेकर होने की संभावना है. यदि आयोग की योजना निर्धारित समय के अनुसार लागू होती है, तो पहली बार पंच और सरपंच पदों के लिए भी बैलेट पेपर की जगह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM से मतदान कराया जा सकता है.
पंचायत चुनाव में खत्म हो सकता है बैलेट पेपर
अभी तक मध्य प्रदेश में पंच और सरपंच के चुनाव बैलेट पेपर के जरिए होते रहे हैं. वहीं जिला पंचायत और जनपद पंचायत सदस्यों के लिए EVM से मतदान कराया जाता है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव के सभी प्रमुख पदों के लिए EVM का इस्तेमाल किया जा सकेगा.
आयोग का मानना है कि इससे मतदान के साथ मतगणना की प्रक्रिया भी अधिक तेज और व्यवस्थित हो सकती है. साथ ही चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में भी तकनीक की अहम भूमिका रहेगी.
चुनावी तैयारियों की समीक्षा शुरू
आगामी चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की है. इसमें विभिन्न जिलों के उप निर्वाचन अधिकारियों और मास्टर ट्रेनर्स ने हिस्सा लिया. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि EVM से संबंधित व्यवस्थाओं, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधनों की तैयारी समय रहते पूरी कर ली जाए.
आयोग चाहता है कि मतदान के दौरान तकनीकी कारणों से किसी तरह की परेशानी न हो. इसके लिए मशीनों की उपलब्धता और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
जून में नगरीय निकाय, जुलाई में पंचायत चुनाव की संभावना
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार जून 2027 में प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में चुनाव कराए जाने की संभावना है. इसके लिए करीब 22 हजार मतदान केंद्र बनाए जा सकते हैं. इसके बाद जुलाई में पंचायत चुनाव कराने की तैयारी है.
आयोग की कोशिश है कि दोनों चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और बेहतर प्रबंधन के साथ संपन्न कराए जाएं.
संवेदनशील बूथों पर होगी लाइव निगरानी
चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए संवेदनशील मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित है. इसके जरिए मतदान केंद्रों की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखी जा सकेगी. किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल कार्रवाई करने में भी मदद मिलेगी.
प्रशिक्षण और तकनीकी व्यवस्था पर जोर
राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने अधिकारियों को EVM संचालन, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता से जुड़े काम तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं. उनका कहना है कि स्थानीय चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी कड़ी हैं. इसलिए मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष होने के साथ मतदाताओं के भरोसे पर भी खरी उतरनी चाहिए.
अगर प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है, तो मध्य प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों के लिए पूरी तरह EVM आधारित मतदान की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. यह कदम स्थानीय चुनावों को तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.









