भोपाल/खबरडिजिटल/अमित मिश्रा/ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को रिटेल और थोक दवा व्यापारी हड़ताल पर रहे। इस दौरान मेडिकल शॉप व्यापारियों ने ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स यानी AIOCD के आह्वान पर यह एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी बंद बुलाया गया है.एमपी के कई जिलों के मेडिकल व्यापारियों ने इस बंद का पूरा समर्थन करते हुए अपनी दुकानें बंद रखी।
क्यों बंद है Medical Shops
AIOC के मुताबिक संगठन लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से संपर्क कर रहा था. संगठन के अध्यक्ष जे.एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने बताया कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को कई बार ज्ञापन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसी कारण देशभर के लाखों केमिस्ट और दवा वितरकों ने बंद का फैसला लिया है. मेडिकल व्यापारियों की प्रमुख मांगों में अवैध ई-फार्मेसी पर पूरी तरह रोक लगाना, कॉरपोरेट कंपनियों की शोषणकारी प्राइसिंग पर नियंत्रण और कुछ सरकारी नोटिफिकेशन वापस लेना शामिल है. उनका कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना पर्याप्त निगरानी के दवाओं की बिक्री हो रही है, जो मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.
AIOCD मांगें क्या है -
संस्था की केंद्र सरकार से मांग है कि प्रीडेटरी प्राइसिंग (Predatory Pricing) रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
ऑनलाइन फार्मेसी और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों की जांच कर छोटे केमिस्ट दुकानदारों के हितों की रक्षा की जाए।
एनपीपीए, डीसीजीआई, सीसीआई और राज्य ड्रग कंट्रोलर को कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।
सरकार यह सुनिश्चित करे कि सिस्टम में दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन की डुप्लीकेसी न हो।
प्रतिबंधित दवाएं आसानी से उपलब्ध न हों और डॉक्टरों व केमिस्टों का सही पंजीकरण हो.
एक ऐसा क्यूआर कोड सिस्टम बनाया जाए, जो मरीज के मोबाइल पर एक बार खुलने के बाद दोबारा इस्तेमाल न हो सके।
यह पूरी व्यवस्था किसी निजी पोर्टल के बजाय सरकारी पोर्टल पर हो।
AIOCD ने कहा कि अगर सरकार इस तरह का सुरक्षित सिस्टम लाती है तो हम पूरा सहयोग देंगे।
AIOCD को इन बातों पर आपत्ति
AIOCD के महासचिव राजीव सिंघल का कहना है कि ई-फार्मेसी और इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स गलत या फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर भी दवाइयां दे रहे हैं. ऑनलाइन फार्मेसी को भी पारंपरिक मेडिकल स्टोर की तरह सख्त नियमों के तहत संचालित किया जाना चाहिए. दवा विक्रेता दवाओं की ऑनलाइन बिक्री का विरोध कर रहे हैं. उनका तर्क है कि बाजार में मौजूद फार्मेसियां डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाएं देती हैं. उनके पास एंटीबायोटिक्स, मादक पदार्थ और प्रेग्नेंसी किट जैसी प्रतिबंधित दवाओं का विस्तृत रिकॉर्ड होता है।
जबकि ई-फार्मेसी आसी दवाएं हिना किसी वैध प्रिस्क्रिप्शन के ऑनलाइन बेच रही हैं. इनको प्रतिबंधित किया जाना चाहिए. ऑनलाइन दवा लेनदेन में फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के इस्तेमाल का भी खतरा है. कई दवाओं की कीमतें राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) तय करती है, लेकिन ऑनलाइन कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार को बिगाड़ रही हैं।
रिटेल केमिस्ट को आमतौर पर लगभग 16% मार्जिन मिलता है, इसलिए ऑनलाइन जितना बड़ा डिस्काउंट देना सामान्य व्यापार नियमों के अनुसार संभव नहीं लगता.ऑनलाइन दवा बिक्री पूरी तरह कानूनन मान्यता प्राप्त नहीं है। कुछ मामलों में नकली और प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के आरोप सामने आए हैं. ऐसे मामलो में डीसीजीआई और कुछ राज्यों ने पहले भी कार्रवाई की है।









