भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में लंबे समय से लंबित भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) कैडर रिव्यू की प्रक्रिया एक बार फिर गति पकड़ती नजर आ रही है। पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) ने प्रदेश में लगभग 30 नए आईपीएस पद सृजित करने का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेज दिया है। राज्य सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। प्रस्ताव में नए पदों का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा राज्य पुलिस सेवा से पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों के लिए आरक्षित रखने का सुझाव दिया गया है।
319 स्वीकृत पदों में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव
वर्तमान में मध्य प्रदेश में आईपीएस कैडर के 319 स्वीकृत पद हैं। पीएचक्यू ने इस संख्या में करीब 10 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के अनुसार पुलिस अधीक्षक (एसपी) से लेकर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) स्तर तक विभिन्न रैंक के पद बढ़ाए जाने की योजना है। इससे प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप पुलिस व्यवस्था को और मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
कैडर रिव्यू में देरी से प्रभावित हुए अधिकारी
राज्य में आईपीएस कैडर रिव्यू की प्रक्रिया लंबे समय से विलंबित रही है। इसका असर राज्य पुलिस सेवा के उन अधिकारियों पर पड़ा है, जो समय पर पदोन्नति के माध्यम से आईपीएस कैडर में शामिल हो सकते थे। कई अधिकारी निर्धारित आयु सीमा पार कर चुके हैं, जिससे उनका आईपीएस में चयन प्रभावित हुआ है।
कैट ने सरकारों से मांगा था जवाब
कैडर रिव्यू में देरी को लेकर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की जबलपुर खंडपीठ भी पहले नाराजगी जता चुकी है। करीब तीन माह पहले हुई सुनवाई में अधिकरण ने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। यह मामला वर्ष 1998 बैच के राज्य पुलिस सेवा के तीन अधिकारियों की याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने 56 वर्ष की आयु पार करने के बावजूद आईपीएस में पदोन्नति के लिए अपने दावे पर विचार करने की मांग की थी। उनका कहना था कि हर पांच वर्ष में होने वाला अनिवार्य कैडर रिव्यू समय पर नहीं होने से उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं। मामले की प्रारंभिक सुनवाई में कैट ने सरकारों से जवाब भी तलब किया था।
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अधिकारियों की बढ़ेगी उपलब्धता
अब राज्य सरकार और केंद्र की मंजूरी के बाद कैडर रिव्यू की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। यदि प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो इससे राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को पदोन्नति के नए अवसर मिल सकते हैं और पुलिस प्रशासन में अधिकारियों की उपलब्धता भी बढ़ेगी। इस कवायद को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की नाराजगी का असर भी माना जा रहा है।









