MP Congress: मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन में एक बड़ा फेरबदल होने के संकेत मिल रहे हैं। राज्य की राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज की है, जिसके चलते कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। दिल्ली दरबार से आ रही खबर के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की सांगठनिक कमान को बहुत जल्द बदला जा सकता है। आलाकमान अब साल 2028 के आगामी मध्य प्रदेश विधानसभा और उसके बाद होने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सूबे में एक नए चेहरे को कमान सौंपने का मन बना चुका है।
दिखावे का विरोध प्रदर्शन
राज्यसभा चुनाव के दौरान जैसे ही कांग्रेस की आधिकारिक उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तकनीकी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा रद्द किया गया, वैसे ही प्रदेश संगठन में अफरा-तफरी मच गई। जीतू पटवारी ने आनन-फानन में विधायकों की बाड़ेबंदी करने और उन्हें राज्य से बाहर ले जाने का एक बड़ा राजनैतिक स्वांग रचा, जिसे दिल्ली को रास नहीं आईं।
रिपोर्ट से खुली पोल!
कांग्रेस सूत्रों की माने तो आलाकमान को भेजी गई सीक्रेट रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है कि प्रदेश नेतृत्व को पहले से आभास था कि मीनाक्षी नटराजन के हलफनामे पर कानूनी पेंच फंस सकता है। आरोप है कि इसके बावजूद नामांकन को खारिज होने से बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, बल्कि दिखावे का प्रदर्शन और सड़कों पर पुतला दहन किया जाता रहा।
विधायकों ने खोला के खिलाफ मोर्चा!
इस उठापटक के पीछे एक और बड़ा मोर्चा खुला हुआ है, जिसने आग में घी का काम किया है। राजनैतिक जानकारों की माने तो जीतू पटवारी खुद इस बार राज्यसभा की सीढ़ियां चढ़ने का सपना संजोए बैठे थे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि राष्ट्रीय नेतृत्व इस बार उनके नाम पर मुहर लगाएगा। लेकिन ऐन वक्त पर जब राहुल गांधी की ओर से मीनाक्षी नटराजन के नाम का ऐलान हुआ, तो प्रदेश गुटबाजी ने अंदर ही अंदर करवट बदल ली। यही कारण है कि पार्टी में प्रदर्शन सहित कई चीजें केवल दिखावे के लिए होती रहीं जबकि आंतरिक रूप से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
विधायकों का अविश्वास
नामांकन रद्द होने के इस ब्लंडर के बाद कांग्रेस के कई मौजूदा विधायकों ने सीधे तौर पर प्रदेश अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर अविश्वास जताया है। विधायकों का कहना है कि प्रदेश नेतृत्व की लापरवाही और अंदरी भितरघात के चलते राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की फजीहत हुई है। यह सारी रिपोर्ट लिखित में दिल्ली तक पहुंचाई गई है।
नए सेनापति की तलाश तेज!
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की कोर टीम ने मध्य प्रदेश के इस मामले को गंभीरता से लिया है। अब जीतू पटवारी को पीसीसी चीफ के पद पर बनाए रखने की कड़ियां कमजोर हो चुकी हैं। दिल्ली हाईकमान अब मध्य प्रदेश में एक ऐसे गंभीर चेहरे को कमान सौंपने की तलाश में जुट गया है, जो गुटबाजी से ऊपर उठकर साल 2028 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की नैया पार लगा सके। इसी महीने आलाकमान मध्य प्रदेश को लेकर कोई बड़ा फैसला सुना सकता है।









