भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ पिछले 1 साल से मोहन यादव मंत्रिमंडल के विस्तार के कयास लगाए जा रहे हैं। कई बार संभावित तारीख की बात होने के बाद भी मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुछ दिन पहले ही राज्यपाल मंगूभाई पटेल से मुलाकात की, उसके बाद कैबिनेट विस्तार की बातों को बल मिलने लगा, जिसको लेकर कहा जा रहा है कि अब यह मामला चौथे चरण की चर्चा तक पहुंच गया है। पिछले 1 साल से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पत्रकार, विधायक, सांसद, पार्टी के पदाधिकारी इस विषय पर चर्चा कर रहे थे, जबकि अब इसके अंतिम बिंदु तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
इन चेहरों को मिल सकता है मौका
राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ मौजूदा मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा के बाद नए चेहरों को शामिल किए जाने और वरिष्ठ विधायकों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। संभावित नए चेहरे और चर्चा में आए नाम रीति पाठक (सांसद से विधायक बनीं नेता), मालिनी गौड़ (इंदौर से वरिष्ठ विधायक), प्रदीप लारिया (सागर क्षेत्र से प्रमुख दावेदार), बृजेंद्र प्रताप सिंह (पन्ना से पूर्व मंत्री), प्रभुराम चौधरी या बृजेंद्र सिंह यादव (संभावित सिंधिया खेमे से) शामिल है। ये सभी नाम क्षेत्रीय, जातीय और वरिष्ठता क्रम के आधार पर लिए जा रहे हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार क्यों जरुरी?
दतिया उपचुनाव में हार के बाद बीजेपी नई रणनीति के साथ आगामी चुनौतियों का सामना करने के साथ आगे बढ़ने की तैयारियों में जुटी है। इसी रणनीति में मंत्रिमंडल विस्तार को भी बताया जा रहा है, क्योंकि कुछ मंत्रियों की विधासनभा में स्थिति भी कमजोर बताई जा रही है, उनकी जगह अन्य नामों को शामिल करने के कयास लगाए जा रहे हैं, इन नेताओं को अपनी विधानसभा में भेजा जा सकता है, ताकि वो अपनी स्थिति में बदलाव कर सके। पार्टी संगठन भी अंदरुनी रिपोर्ट तैयार करा रहा है कि कमजोर स्थिति वाले विधायकों को पार्टी का काम पूरी शिद्दत करने के निर्देश दिए जाए।
वरिष्ठ मंत्रियों को लेकर आलाकमान करेगा फैसला
सीएम डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में उनसे राजनीतिक सीनियर नेता मंत्री पद पर काबिज है। इसके चलते कई बार अदावत की स्थिति भी निर्मित हो रही है। इन परिस्थितियों पर लगाम लगाने के लिए पार्टी संगठन आलाकमान को बता चुका है। जिसके चलते पार्टी को कई स्तर पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है। आने वाले वक्त की चुनौतियों के चलते पार्टी संगठन दिल्ली के निर्देश पर कोई नया निर्णय भी ले सकता है। कहा यह भी जा रहा है कि इनको लोकसभा चुनाव के लिए तैयार किया जा सकता है, जोकि बेहतरीन विदाई का संकेत भी होगा, या फिर किसी राज्य का राज्यपाल बनाकर उपकृत भी किया जा सकता है।









