मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक स्तर पर बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है. दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद पार्टी के भीतर संगठन की कार्यप्रणाली और जमीनी तैयारियों को लेकर समीक्षा की चर्चा है. सत्ता में रहते हुए उपचुनाव में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के बाद स्थानीय नेतृत्व और बूथ स्तर की सक्रियता पर मंथन किए जाने की बात सामने आ रही है.
11 जिलों में बदलाव की अटकलें
पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ जिलों में संगठन की स्थिति का बूथ स्तर तक आकलन किया गया है. इस समीक्षा के आधार पर करीब 11 जिलों के जिलाध्यक्षों को बदले जाने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, भाजपा ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक फैसला या घोषणा नहीं की है.
चर्चा में जिन जिलों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें उमरिया, रायसेन, बालाघाट, टीकमगढ़, सिवनी, नर्मदापुरम और खरगोन समेत अन्य जिले शामिल बताए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि संभावित फेरबदल का उद्देश्य संगठन को अधिक सक्रिय बनाना और आने वाले चुनावों के लिए जमीनी नेटवर्क को मजबूत करना है.
सिफारिश से ज्यादा कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर जोर
संगठन में संभावित बदलाव को लेकर पार्टी के अंदर नियुक्तियों के तरीके पर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है. कुछ स्थानों पर प्रभावशाली नेताओं की पसंद के आधार पर पद दिए जाने की शिकायतें सामने आने का दावा किया जा रहा है. ऐसे में नेतृत्व अब उन पदाधिकारियों को प्राथमिकता देने पर विचार कर सकता है, जिनकी कार्यकर्ताओं के बीच अच्छी पकड़ और बूथ स्तर पर मजबूत सक्रियता है.
विधानसभा चुनाव में सक्रिय रहे चेहरों को मिल सकती है जिम्मेदारी
सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव के दौरान बेहतर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों पर भी भाजपा नेतृत्व की नजर है. जिन नेताओं ने अपने क्षेत्रों में संगठन को सक्रिय करने और चुनावी अभियान को मजबूती देने में भूमिका निभाई, उन्हें जिलास्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है.
फिलहाल जिलाध्यक्षों में बदलाव को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है. इसलिए 11 जिलों में फेरबदल की चर्चा को अभी संभावित संगठनात्मक बदलाव के तौर पर ही देखा जा रहा है. आने वाले दिनों में पार्टी की बैठकों और संगठन स्तर पर होने वाले फैसलों के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है.









