मध्य प्रदेश भाजपा में निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में हुई नियुक्तियों के बाद सामने आई अंदरूनी नाराजगी को लेकर अब संगठन ने सख्त रुख अपना लिया है. बुधवार रात हुई पार्टी की अहम बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने साफ संकेत दे दिए कि गुटबाजी और व्यक्तिगत राजनीति को किसी भी स्थिति में बढ़ावा नहीं दिया जाएगा. पार्टी नेताओं से कहा गया कि सभी को संगठन की तय मर्यादा में रहकर काम करना होगा और सामूहिक नेतृत्व की भावना को प्राथमिकता देनी होगी.
अब पार्टी में नहीं चलेगी गुटबाजी
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल, प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. वहीं सांसद, मंत्री, विधायक और निगम-मंडलों में हाल ही में नियुक्त पदाधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए. बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन में एकरूपता बनाए रखना और नियुक्तियों को लेकर उठ रही असंतोष की आवाजों को शांत करना था. पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कहा कि सभी नियुक्तियां लंबी चर्चा और आपसी सहमति के बाद तय की गई हैं. ऐसे में किसी भी स्तर पर इन फैसलों का विरोध करना संगठन की भावना के खिलाफ माना जाएगा. नेताओं को यह भी समझाया गया कि सार्वजनिक मंचों पर पार्टी की एकजुटता दिखाई देनी चाहिए और व्यक्तिगत मतभेदों को बाहर नहीं आने देना चाहिए.
नियुक्त किए गए अधिकारियों को करना होगा काम
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी बैठक में कहा कि निगम-मंडलों, आयोगों और प्राधिकरणों में नियुक्त किए गए सभी लोगों को सामूहिक भावना के साथ काम करना होगा. उन्होंने नए पदाधिकारियों से आपसी समन्वय बनाए रखने और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देने की बात कही. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि सरकार और संगठन दोनों मिलकर पार्टी की कार्यशैली को अनुशासित और प्रभावी बनाए रखना चाहते हैं.
नियुक्तियों को लेकर असहमति और नाराजगी की खबरें
सूत्रों के मुताबिक कुछ जिलों में नियुक्तियों को लेकर असहमति और नाराजगी की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद संगठन ने तुरंत सक्रियता दिखाई. प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने निर्देश दिए कि जब नए पदाधिकारी अपने जिलों में पहुंचें तो उनका स्वागत सामूहिक रूप से किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि स्वागत कार्यक्रमों में व्यक्तिगत प्रचार या शक्ति प्रदर्शन जैसी तस्वीर नहीं दिखनी चाहिए. बैठक में कोर ग्रुप बैठकों की अनियमितता पर भी चिंता जताई गई. पार्टी नेतृत्व ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कई मंत्री और विधायक इन बैठकों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. इसके बाद सभी जनप्रतिनिधियों को नियमित रूप से कोर ग्रुप बैठकों में शामिल होने और संगठनात्मक गतिविधियों को समय देने के निर्देश दिए गए.
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