MP Transfer Policy Rules: मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार ने काफी लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नई तबादला नीति 2026 को हरी झंडी दे दी है। इस नीति के जारी होते ही प्रदेश में सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के स्थानांतरण पर लगा लंबे समय का प्रतिबंध अब पूरी तरह हटा गया है। नई गाइडलाइन के अनुसार, सूबे में 1 जून से लेकर 15 जून 2026 तक ट्रांसफर किए जा सकेंगे। वहीं, मुख्यमंत्री की विशेष A प्लस नोटशीट के तहत होने वाले हाई-प्रोफाइल तबादलों की प्रक्रिया को 31 मई 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। इस बार की ट्रांसफर पॉलिसी में सरकार ने पारदर्शिता लाने और ग्रामीण-आदिवासी अंचलों में प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के लिए कई बड़े और कड़े नियम जोड़े हैं।
ई-ऑफिस से मंजूर होंगे ट्रांसफर
भ्रष्टाचार और दलाली को खत्म करने के लिए सरकार ने इस बार डिजिटल सिस्टम को अनिवार्य कर दिया है। चाहे स्वैच्छिक ट्रांसफर हो या प्रशासनिक, सभी तबादलों की फाइलें केवल और केवल ई-ऑफिस पोर्टल के माध्यम से ही आगे बढ़ेंगी। विभागीय मंत्रियों और जिलों के प्रभारी मंत्रियों की अनुशंसा पर ही तबादले होंगे, लेकिन अंतिम विभागीय अनुमोदन कागजी फाइलों के बजाय ई-ऑफिस डिजिटल सिग्नेचर के जरिए ही मान्य होगा।
20% तय की अधिकतम सीमा
सरकार ने थोकबंद तबादलों पर लगाम कसने के लिए पदों की संख्या के आधार पर प्रतिशत का एक स्लैब तैयार किया है। किसी भी विभाग में कुल पदों के 20 प्रतिशत से ज्यादा तबादले नहीं किए जा सकेंगे।
200 तक पद संख्या वाले संवर्ग: अधिकतम 20% तबादले।
201 से 1000 पद संख्या वाले संवर्ग: अधिकतम 15% तबादले।
1001 से 2000 पद संख्या वाले संवर्ग: अधिकतम 10% तबादले।
2001 से अधिक पद संख्या वाले संवर्ग: वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों की कुल संख्या के तय अनुपात के आधार पर।
आदिवासी और अनुसूचित क्षेत्र पहले
ट्रांसफर के जरिए भरे जाने वाले रिक्त पदों को सबसे पहले अनुसूचित क्षेत्रों में भरा जाएगा। इन क्षेत्रों में 100% पदों की पूर्ति होने के बाद ही गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में पोस्टिंग दी जाएगी। यदि किसी कर्मचारी का ट्रांसफर अनुसूचित क्षेत्र से सामान्य क्षेत्र में होता है, तो उसे तब तक विभाग से कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा, जब तक कि उसकी जगह लेने वाला नया अधिकारी-कर्मचारी वहां आकर पदभार न संभाल ले। हालांकि, एक अनुसूचित क्षेत्र से दूसरे अनुसूचित क्षेत्र में ट्रांसफर होने पर यह रोक लागू नहीं होगी।
पति-पत्नी और बीमारों को बड़ी राहत
जिलों के अंदर होने वाले क्लर्क, चपरासी और अन्य तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले अब प्रभारी मंत्री की सहमति से सीधे कलेक्टर कर सकेंगे। वहीं डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदार जैसे राजपत्रित अधिकारियों की फील्ड पोस्टिंग प्रभारी मंत्री के परामर्श के बाद ही तय होगी। शासकीय सेवा में कार्यरत पति-पत्नी को एक ही शहर या स्थान पर पदस्थापना देने का संवेदनशील प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही कैंसर, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों को भी ट्रांसफर में विशेष रियायत और प्राथमिकता दी जाएगी।
यहां लागू नहीं होंगे ये नियम
सरकार ने साफ किया है कि यह सामान्य नीति मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा और मंत्रालय कैडर के कर्मचारियों पर लागू नहीं होगी। इसके अलावा गृह विभाग के अंतर्गत आने वाले डीएसपी रैंक से छोटे स्तर के पुलिस अधिकारियों के तबादले की जिम्मेदारी पुलिस स्थापना बोर्ड के पास सुरक्षित रहेगी।









