भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने ‘मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता), 2026’ को मंजूरी दे दी है। इसके लागू होने के बाद प्रदेश में दुकानें, मॉल, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान जरूरत के मुताबिक 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित किए जा सकेंगे। हालांकि, प्रतिष्ठानों को चौबीसों घंटे खोलने की अनुमति के साथ कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े नियम भी लागू रहेंगे। किसी कर्मचारी से तय सीमा से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा और ओवरटाइम की स्थिति में नियमानुसार अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
24x7 कारोबार की खुली राह
नई व्यवस्था के तहत दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालन के समय को लेकर मौजूदा प्रतिबंधों में ढील दी गई है। अब कारोबारी अपनी जरूरत और व्यवसाय की प्रकृति के अनुसार प्रतिष्ठान को पूरे दिन और सप्ताह के सातों दिन संचालित कर सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इससे व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार होगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्रदेश में कारोबार के लिए अधिक अनुकूल माहौल तैयार होगा। हालांकि, देर रात तक प्रतिष्ठान संचालित करने पर सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का पालन अनिवार्य रहेगा।
कर्मचारी सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं करेंगे
प्रतिष्ठान 24 घंटे चल सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों से भी लगातार काम कराया जा सकेगा। नई व्यवस्था में किसी कर्मचारी से सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा। 24 घंटे चलने वाले प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों की ड्यूटी शिफ्ट के आधार पर तय करनी होगी। इसके अलावा दैनिक काम के घंटों की भी सीमा निर्धारित की गई है। प्रावधानों के मुताबिक कर्मचारी से एक दिन में 12 घंटे से अधिक काम नहीं कराया जा सकेगा। यदि निर्धारित समय से अतिरिक्त काम लिया जाता है तो कर्मचारी की सहमति आवश्यक होगी। साथ ही ओवरटाइम के लिए लागू नियमों के अनुसार अतिरिक्त भुगतान भी करना होगा।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से कारोबारियों को राहत
नई संहिता में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पंजीयन की प्रक्रिया को भी सरल बनाने का प्रावधान किया गया है। अब प्रतिष्ठान को एक बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जिसके बाद उसे एक विशिष्ट पहचान संख्या मिलेगी। भविष्य में प्रतिष्ठान से संबंधित किसी जानकारी में बदलाव होने पर कारोबारी उसे ऑनलाइन अपडेट कर सकेंगे। इससे बार-बार पंजीयन कराने और कागजी कार्रवाई की जरूरत कम होगी।
सुरक्षा इंतजाम रखना अनिवार्य
24 घंटे कारोबार की अनुमति के साथ प्रतिष्ठान संचालकों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। कार्यस्थल पर साफ-सफाई, अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन व्यवस्था और आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना जरूरी होगा। रात के समय संचालन करने वाले प्रतिष्ठानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारियों और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम मौजूद हों। किसी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी जरूरी होगी।
महिला कर्मचारियों के लिए रात की शिफ्ट में विशेष प्रावधान
नई व्यवस्था में महिलाओं को भी रात की शिफ्ट में काम करने का अवसर मिलेगा, लेकिन इसके लिए सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना होगा। नियोक्ता को महिला कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुरक्षा और परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसका उद्देश्य यह है कि 24 घंटे कारोबार की व्यवस्था का लाभ महिला कर्मचारियों को भी मिले और रात की ड्यूटी के दौरान उनकी सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की पहल
संहिता में असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने पर भी जोर दिया गया है। रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, निर्माण श्रमिक और अन्य श्रमिकों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। श्रमिकों की शिकायतों के समाधान के लिए भी व्यवस्था को मजबूत करने का प्रावधान है, ताकि कामगार अपनी समस्याएं संबंधित विभाग तक आसानी से पहुंचा सकें।
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नियमों का उल्लंघन किया तो होगी कार्रवाई
नई संहिता के तहत श्रम विभाग के अधिकारियों को प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करने और आवश्यक दस्तावेजों की जांच करने का अधिकार रहेगा। यदि किसी प्रतिष्ठान में कर्मचारियों के काम के घंटे, ओवरटाइम, सुरक्षा या अन्य श्रम नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो विभाग जांच कर कार्रवाई कर सकेगा।
कर्मचारियों की अनदेखी होगी खास
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में अब कारोबारियों के लिए 24x7 संचालन का रास्ता खुल गया है, लेकिन इसके साथ कर्मचारियों के काम के घंटे, ओवरटाइम, सुरक्षा और महिला कर्मचारियों की सुविधाओं को लेकर जिम्मेदारियां भी तय कर दी गई हैं। यानी प्रतिष्ठान रात-दिन खुले रह सकते हैं, लेकिन कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकेगी।









