अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर रसोई गैस वितरकों ने अब आर-पार का रुख अपना लिया है. एक सितंबर से चरणबद्ध तरीके से विरोध दर्ज करा रहे वितरकों का सब्र अब जवाब दे चुका है. एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि 26 अक्टूबर को पूरे देश में रसोई गैस की सप्लाई ठप रखकर हड़ताल की जाएगी. इसके साथ ही अपनी बात केंद्र सरकार तक मजबूती से पहुंचाने के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा धरना दिया जाएगा.
डिलीवरी चार्ज बढ़ाने और e-KYC कमीशन की मुख्य मांग
वितरकों की सबसे बड़ी शिकायत बढ़ती लागत और अतिरिक्त काम के एवज में मिलने वाले अपर्याप्त मुआवजे को लेकर है. उन्होंने मांग रखी है कि सिलेंडर की होम डिलीवरी पर तुरंत 75 रुपये प्रति सिलेंडर का इजाफा किया जाए. इसके साथ ही उपभोक्ताओं का केवाईसी (e-KYC) पूरा करने के बदले वितरकों को 236 रुपये का भुगतान मिलना चाहिए. वितरकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई में वे लगातार घाटे और प्रशासनिक दबाव के बीच काम कर रहे हैं, जिससे एजेंसियों को चलाना अब बेहद मुश्किल होता जा रहा है.
तेल कंपनियों की मनमानी और थोपे गए बिक्री टारगेट पर नाराजगी
एसोसिएशन ने तेल विपणन कंपनियों की कार्यशैली पर गहरा ऐतराज जताया है. वितरकों का आरोप है कि उन पर नॉन-फ्यूल रिलेटेड और एआरबी (ARB) उत्पादों को बेचने के लिए गैर-जरूरी दबाव बनाया जा रहा है. इसके अलावा, कमर्शियल (नॉन-डोमेस्टिक) एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री के लिए जबरन टारगेट तय कर दिए जाते हैं, जो पूरी तरह अनुचित है. वितरक इंडेंट प्रक्रिया में बिना सहमति बदलाव, एफटीएल (FTL) सिलेंडरों की बिक्री से जुड़ी पाबंदियों और पीएनजी (PNG) के अनिवार्य इस्तेमाल की शर्त को तुरंत खत्म करने की मांग कर रहे हैं.
राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, आपूर्ति अधिकारी ने सुचारु व्यवस्था बनाए रखने को कहा
अपनी इन सभी चिंताओं को लेकर वितरकों का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा. वहां उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन एडीएम (प्रशासन) डॉ. वैभव शर्मा को सौंपा और तेल कंपनियों के रवैये पर तुरंत हस्तक्षेप की गुहार लगाई.
दूसरी ओर, हड़ताल के ऐलान और उपभोक्ताओं की संभावित परेशानी को देखते हुए जिला पूर्ति अधिकारी अजय प्रताप सिंह ने मंगलवार को वितरकों के साथ अहम बैठक की. उन्होंने वितरकों की समस्याओं पर चर्चा करने के साथ ही उन्हें सख्त निर्देश दिए कि घरेलू गैस सिलेंडर की वितरण व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि एजेंसियां अपनी मांगें जरूर रखें, लेकिन आम ग्राहकों को रसोई गैस की सप्लाई निर्बाध रूप से मिलती रहनी चाहिए.









