जब भी कोई व्यक्ति बीमार होता है तो उसका शरीर कई तरह के संकेतों के माध्यम से समस्या की जानकारी देने की कोशिश करता है. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की वजह से आज अधिकांश बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है और उनका इलाज भी संभव है. लेकिन जब कोई व्यक्ति बेहद गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा हो या जीवन के अंतिम चरण के करीब पहुंच रहा हो, तब शरीर में कुछ विशेष बदलाव दिखाई देने लगते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इन संकेतों को समझना जरूरी है, क्योंकि कई बार इन्हें सामान्य मानकर अनदेखा कर दिया जाता है और स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है.
आवाज और सांस में आने लगते हैं बदलाव
जीवन के अंतिम समय में व्यक्ति की आवाज पहले जैसी नहीं रहती. कई मामलों में गले और फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे बोलने और सांस लेने का तरीका बदल जाता है. सांस लेते समय घरघराहट या भारी आवाज सुनाई दे सकती है. यह सामान्य सर्दी या गले की परेशानी से अलग स्थिति होती है. इसके साथ ही सांस लेने की गति भी असामान्य हो जाती है. कभी मरीज बहुत तेजी से सांस लेता है तो कभी दो सांसों के बीच लंबा अंतर दिखाई देता है. कई बार सांस छोड़ते समय तेज आवाज भी सुनाई देती है.
दिमागी स्थिति पर पड़ता है असर
शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने और महत्वपूर्ण अंगों के कमजोर पड़ने का असर मस्तिष्क पर भी दिखाई देता है. ऐसे समय में व्यक्ति भ्रमित महसूस कर सकता है. उसे आसपास के लोगों को पहचानने में परेशानी हो सकती है और उसकी याददाश्त भी प्रभावित हो सकती है. कई मरीजों में बेचैनी, असमंजस और व्यवहार में अचानक बदलाव देखने को मिलते हैं. ये संकेत बताते हैं कि शरीर सामान्य रूप से काम नहीं कर रहा है.
हाथ-पैर ठंडे पड़ना भी हो सकता है संकेत
जब शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को अधिक रक्त की आवश्यकता होती है, तब रक्त संचार मुख्य रूप से उन्हीं हिस्सों तक सीमित होने लगता है. इसका असर शरीर के अन्य भागों पर पड़ता है. हाथ और पैर ठंडे महसूस होने लगते हैं और त्वचा पर नीले या बैंगनी रंग के निशान दिखाई दे सकते हैं. यह स्थिति रक्त प्रवाह में कमी का संकेत मानी जाती है और इसे गंभीरता से लेना चाहिए.
हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी आपात स्थितियां
कई बार बिना किसी बड़े संकेत के अचानक हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक जैसी स्थितियां सामने आ सकती हैं. ऐसी मेडिकल इमरजेंसी में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. डॉक्टर इसे गोल्डन ऑवर कहते हैं. यदि मरीज को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है. लेकिन देरी होने पर खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
अधिक खून बहना भी बन सकता है जानलेवा
दुर्घटना, गहरी चोट या किसी गंभीर फ्रैक्चर के बाद शरीर से अत्यधिक रक्तस्राव होना बेहद खतरनाक हो सकता है. कई बार बाहरी चोट छोटी दिखाई देती है, लेकिन अंदरूनी ब्लीडिंग लगातार जारी रहती है. ऐसी स्थिति में शरीर शॉक की अवस्था में जा सकता है, जो जान के लिए खतरा पैदा कर सकती है.
लापरवाही नहीं, तुरंत लें चिकित्सा सहायता
विशेषज्ञों के अनुसार ऊपर बताए गए संकेत किसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी या जीवन के अंतिम चरण की ओर इशारा कर सकते हैं. इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा देने या घरेलू इलाज पर निर्भर रहने की गलती नहीं करनी चाहिए.
स्थिति गंभीर लगते ही तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं और मरीज को योग्य डॉक्टर की निगरानी में इलाज दिलाएं. समय पर लिया गया सही फैसला कई बार किसी की जान बचा सकता है.









