Datia By-Election: मध्य प्रदेश की सियासत की सबसे हॉट सीट दतिया विधानसभा एक बार फिर चुनावी जंग के लिए तैयार है। दतिया में उपचुनाव का बिगुल फूंकते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। यह चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों की साख का सवाल बन चुका है। जहां भाजपा अपनी खोई हुई जमीन वापस पाना चाहती है, वहीं अंदरूनी कलह से जूझ रही कांग्रेस के लिए यह कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकने का मौका है।
भारतीय जनता पार्टी के खेमे से यह लगभग साफ है कि पूर्व गृहमंत्री और कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर मैदान में उतरेंगे। साल 2008 से इस सीट पर भाजपा का चेहरा रहे नरोत्तम मिश्रा ने यहां लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी, लेकिन पिछले चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इस बार नरोत्तम मिश्रा का मुकाबला उनके पुराने प्रतिद्वंदी राजेंद्र भारती से नहीं होने वाला है। कांग्रेस इस बार नए चेहरों और नए समीकरणों पर दांव खेलने के मूड में है।
कांग्रेस से 3 बड़े दावेदार
कांग्रेस के अंदर टिकट को लेकर मथानी चल रही है, जिसमें तीन नाम रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।
घनश्याम सिंह (पूर्व विधायक): दतिया से दो बार के विधायक रहे घनश्याम सिंह का रिकॉर्ड मजबूत है। साल 2003 की भाजपा लहर में, जब कांग्रेस महज 37 सीटों पर सिमट गई थी, तब भी घनश्याम सिंह ने दतिया से जीत दर्ज की थी। दिलचस्प बात यह है कि तब उन्होंने भाजपा के अवधेश नायक को हराया था।
अवधेश नायक: नियति का खेल देखिए, 2003 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले अवधेश नायक अब कांग्रेस का हाथ थाम चुके हैं और इस उपचुनाव में टिकट के मजबूत दावेदार हैं। नायक का टिकट लगभग तय माना जा रहा है।
अनुज भारती: कांग्रेस के पास एक विकल्प राजेंद्र भारती के बेटे अनुज भारती को उतारने का भी है। अनुज के जरिए पार्टी क्षेत्र में अपने पिता के प्रति सहानुभूति कार्ड को भुनाने की कोशिश कर सकती है।
दामोदर यादव बिगाड़ सकते हैं गणित
चर्चा है कि दामोदर यादव आजाद समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं। वे पिछले कई महीनों से जमीन पर एक्टिव हैं और लगातार तैयारियां कर रहे हैं। यदि वे मैदान में उतरते हैं, तो दोनों दल भाजपा-कांग्रेस के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकते हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय होने की पूरी संभावना है।









