दतिया/खबर डिजिटल/ दतिया भाजपा में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर आज तस्वीर साफ हो गई है। माधवेंद्र सिंह परिहार को भाजपा ने दतिया का नया जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मंजूरी के बाद नियुक्ति आदेश जारी किया गया है और यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू बताया गया है।
दतिया भाजपा की कमान अब माधवेंद्र सिंह परिहार के हाथ
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद पार्टी ने जिले के संगठन में बड़ा बदलाव किया था। उपचुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को करीब 6 हजार वोटों से हराया था। इसके बाद भाजपा ने जिला कार्यकारिणी समेत संगठन की विभिन्न जिला इकाइयों को भंग कर दिया था। हार की समीक्षा के लिए पार्टी ने दो सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया और अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपी। इसके बाद नए संगठन के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
छह नामों में चल रही थी चर्चा
नए जिलाध्यक्ष को लेकर अगस्त से ही भाजपा के भीतर कई नामों पर चर्चा चल रही थी। उस समय माधवेंद्र सिंह परिहार, आशुतोष तिवारी, रामनरेश यादव, कालीचरण कुशवाहा, अनूप यादव और दिनेश शर्मा के नाम संभावित दावेदारों के रूप में सामने आए थे। अब पार्टी ने इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए माधवेंद्र सिंह परिहार के नाम पर मुहर लगा दी है।
संगठन को फिर से खड़ा करना होगी पहली चुनौती
परिहार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी उपचुनाव के बाद बिखरे जिला संगठन को दोबारा सक्रिय करने की होगी। उन्हें जिला कार्यकारिणी के गठन के साथ मंडल और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी संभालनी होगी। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार वे लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं और पहले भी संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में परिहार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि वाला नेता और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी नेताओं में बताया गया है। इन दावों को पार्टी के आधिकारिक नियुक्ति आदेश से अलग समझना चाहिए।
उपचुनाव के बाद पहली बड़ी संगठनात्मक नियुक्ति
दतिया में यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उपचुनाव में हार के बाद भाजपा ने मौजूदा जिला संगठन को पूरी तरह भंग कर दिया था। पार्टी के सामने अब नया संगठन तैयार करने के साथ कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और आगामी चुनावों के लिए जमीनी नेटवर्क को मजबूत करने की चुनौती है।









