उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं. पिछले कुछ महीनों में उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों का लगातार दौरा किया है और विकास परियोजनाओं के जरिए सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया है. मुख्यमंत्री का फोकस विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ लोगों से सीधे संवाद स्थापित करना भी है. माना जा रहा है कि इन दौरों के जरिए सरकार चुनाव से पहले अपने कामकाज को जनता के सामने मजबूती से पेश करना चाहती है.
तीन महीनों में 43 जिलों का दौरा
मई, जून और जुलाई के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कुल 43 जिलों का दौरा किया. इनमें सात जिलों में उन्होंने एक से अधिक बार पहुंचकर कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. वाराणसी का दौरा उन्होंने सबसे ज्यादा चार बार किया. वहीं देवरिया, बिजनौर, प्रयागराज, अयोध्या, कुशीनगर और गाजियाबाद में दो-दो बार पहुंचे. इस दौरान गोरखपुर, सहारनपुर, नोएडा, आगरा, झांसी, फिरोजाबाद, मैनपुरी, गोंडा, बस्ती और श्रावस्ती समेत कई जिलों में सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए गए.
36,877 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
इन दौरों के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर में करीब 36,877 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. सड़क, आधारभूत ढांचा, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं के जरिए सरकार विकास की रफ्तार बढ़ाने का संदेश देने की कोशिश कर रही है. सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं का सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंचेगा और प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी.
विपक्ष पर भी साध रहे निशाना
विकास कार्यों के साथ-साथ मुख्यमंत्री अपनी जनसभाओं में राजनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर बोल रहे हैं. अपने संबोधनों में वह समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर लगातार हमला बोल रहे हैं. कई सभाओं में उन्होंने सपा और कांग्रेस की नीतियों की आलोचना करते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी जिक्र किया. मुख्यमंत्री का कहना है कि उनकी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश निवेश और औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है. वह कानून व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के मुद्दों को सरकार की बड़ी उपलब्धियों के रूप में जनता के सामने रख रहे हैं.
चुनावी तैयारियों को मिल रही रफ्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार दौरे और विकास परियोजनाओं के उद्घाटन को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि चुनाव की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन सरकार की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि चुनाव से पहले विकास और जनसंपर्क दोनों मोर्चों पर पूरी ताकत झोंकी जा रही है.









