मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) ने कहा कि हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि हम चीते छोड़ रहे हैं और हमारे प्रधानमंत्री मोदी टाइगर बनकर देश का मान-सम्मान बढ़ा रहे हैं। उनके शासनकाल में भारत निर्भीकता से सभी तरह की नीतियों को लागू कर रहा है। भारत में आज आनंद का वातावरण है। उन्होंने कहा कि अभी 8 दिन पहले ही चीन के राष्ट्रपति और रूस के राष्ट्रपति के बीच में खड़े हमारे प्रधानमंत्री मोदी की मुस्कान देखकर सीना 56 इंच का हो गया।
उससे कुछ दिन पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि वे अमेरिका में चुनाव कराने की प्रक्रिया भारत से सीखेंगे। उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारत हमेशा दूसरों पर निर्भर रहता था, आज दूसरे लोग हमसे सीख रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि हमारे यहां एक पप्पू है। पप्पू कुछ समझता ही नहीं है। आज इतना अच्छा समय चल रहा है। दुनिया आशा भरी निगाह से भारत की तरफ देख रही है, लेकिन जिसकी सत्ता चली गई, वो इसकी चाह में जो मर्जी में आ रहा है वो कर रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान सभी को सद्बुद्धि दे। उनके भाव उन पर छोड़ें।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर स्थित नौरादेही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 2 चीते छोड़े। उन्होंने उनका नामकरण वियोम और नीरा किया है। सीएम डॉ. यादव ने यहां आयोजित "वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह" के समापन समारोह में गिद्ध संख्या आंकलन-2026 रिपोर्ट जारी की। इसके अलावा उन्होंने बुंदेलखंडी भाषा में लिखी गई 'वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व' किताब का विमोचन भी किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि चीतों की बसाहट के लिए मध्यप्रदेश की धरती अनुकूल है। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तंज भी कसा।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि चीते के इस नए घर अपनी एक अलग विशेषता है। हम जब अपने वन्य प्राणी की चिंता करते हैं, तो यह भी हमारा दायित्व है कि हम अपने ग्रामवासियों की भी चिंता करें। यहां वन विभाग से जुड़ी समितियों भी लाभांवित हुई हैं। जहां-जहां अभयारण्य हैं और पर्यटक आते हैं, वहां पर्यटन से होने वाली आय में स्थानीय ग्रामीणों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
इस वर्ष अभयारण्यों से लगभग 80 करोड़ का कलेक्शन हुआ है, जिसमें से 20 करोड़ की राशि आसपास के ग्रामीणों को वितरित की गई है। यह उनका हक है, क्योंकि वे वर्षों से इन्हीं अभयारण्यों के आसपास अपने गांव और घर आबाद करके रह रहे हैं। इस बात की जानकारी लगने के बाद हमारी सरकार ने तय किया कि जिन ग्रामवासियों को लाभ नहीं मिल रहा है, उन्हें कैबिनेट में फैसला करके लाभ देंगे।









