भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज कर दी हैं. चुनाव में टिकट पाने की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं के लिए इस बार राह पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहने वाली है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, केवल लोकप्रियता या संगठन में सक्रियता के आधार पर टिकट तय नहीं होगा. दावेदारों को संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और सर्वे एजेंसियों की कसौटी पर खरा उतरना होगा. इन तीनों स्तरों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही अंतिम फैसला लिया जाएगा.
बताया जा रहा है कि पार्टी की ओर से अब तक तीन चरणों के सर्वे कराए जा चुके हैं. इन सर्वे के बाद कई नए चेहरे भी टिकट की दौड़ में शामिल हो गए हैं. खासकर जिले की छह विधानसभा सीटों पर दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है. राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के साथ कई नेता अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं.
सर्वे के बाद बढ़ी टिकट की दावेदारी
हालिया सर्वे के बाद कई नए नाम सामने आए हैं. बिलारी, ठाकुरद्वारा और कांठ विधानसभा क्षेत्रों से दो-दो नए दावेदारों ने अपनी सक्रियता बढ़ाई है. वहीं देहात सीट से चार नए चेहरे चर्चा में हैं. नगर विधानसभा सीट पर भी टिकट के इच्छुक नेताओं की संख्या पहले की तुलना में अधिक हो गई है. माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में यह संख्या और बढ़ सकती है.
तीन स्तर पर होगी उम्मीदवारों की जांच
भाजपा में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाती है. पहला चरण संगठन का होता है, जिसमें जिले से आवेदन लेकर उन्हें क्षेत्रीय नेतृत्व के माध्यम से प्रदेश संगठन तक भेजा जाता है. इसके बाद प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से प्रमुख नामों पर विचार किया जाता है.
दूसरा चरण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का होता है. संघ अपने स्तर पर गोपनीय फीडबैक और सर्वे तैयार करता है. विभाग और क्षेत्र स्तर के पदाधिकारी संभावित उम्मीदवारों का मूल्यांकन कर अपनी रिपोर्ट आगे भेजते हैं. यह प्रक्रिया पूरी तरह आंतरिक और गोपनीय मानी जाती है.
तीसरे चरण में पेशेवर एजेंसियों के जरिए सर्वे कराया जाता है. यह सर्वे कई चरणों में होता है, जिसमें जनता की राय, उम्मीदवार की लोकप्रियता, क्षेत्रीय स्वीकार्यता और जीत की संभावना जैसे पहलुओं का आकलन किया जाता है. एजेंसियां अपनी रिपोर्ट सीधे प्रदेश नेतृत्व को सौंपती हैं.
अंतिम फैसला करेगा केंद्रीय नेतृत्व
तीनों स्तरों से प्राप्त रिपोर्ट का मिलान करने के बाद प्रदेश नेतृत्व संभावित उम्मीदवारों के नाम केंद्रीय संसदीय बोर्ड को भेजता है. इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाता है कि किस विधानसभा क्षेत्र से किसे टिकट दिया जाएगा.
भाजपा जिलाध्यक्ष आकाश पाल के अनुसार, फिलहाल जिला स्तर पर टिकट के लिए आवेदन नहीं लिए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि समय-समय पर सर्वे एजेंसियां अपना काम करती रहती हैं और आवश्यकता पड़ने पर पार्टी पदाधिकारियों से भी फीडबैक लिया जाता है. ऐसे में साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट पाने के लिए नेताओं को तीन अलग-अलग स्तर की परीक्षा में सफल होना होगा.









