MP Health System Crisis: मध्यप्रदेश में NHM के संविदा कर्मचारियों का आंदोलन अब आक्रामक मोड़ पर पहुंच चुका है। अपनी मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से लामबंद करीब 32 हजार संविदा स्वास्थ्यकर्मी अब सरकार से सीधे मुकाबले के मूड में हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द ही कोई कदम नहीं उठाया, तो 8 जून 2026 को राजधानी भोपाल में प्रदेश भर के कर्मचारी एकजुट होकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। इस सिलसिले में बुधवार को भोपाल के जेपी अस्पताल परिसर के बाहर कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन कर शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
25 मई से ठप हैं काम
स्वास्थ्यकर्मियों की यह अनिश्चितकालीन हड़ताल पिछले 25 मई से लगातार जारी है। आंदोलनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान साल 2023 में जो संविदा नीति बनाई गई थी, वर्तमान सरकार ने उसे अब तक लागू नहीं किया है। सालों से पूरी निष्ठा के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने रहने के बावजूद उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
सभी 52 जिलों में आंदोलन का असर
इस महा-हड़ताल का असर पूरे मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग पर देखने को मिल रहा है। प्रदेश के सभी 52 जिलों में यह हड़ताल पूरी तरह प्रभावी है, जिसके कारण कई जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सामान्य चिकित्सा सेवाएं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। कई जिलों में तो कर्मचारी अनोखे तरीके अपना रहे हैं। वे अस्पतालों के बाहर श्रमदान कर रहे हैं और आम जनता के बीच जाकर जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
क्या हैं संविदाकर्मियों की मांगें?
कर्मचारियों ने साफ किया है कि वे इस बार बिना लिखित आदेश के काम पर वापस नहीं लौटेंगे। उनकी मांगों की बात करे तो…
नियमितीकरण: विभाग में रिक्त पदों पर सभी संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए।
समान वेतन नीति: समान कार्य के लिए समान वेतन की नीति लागू हो और पुरानी वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए।
सालाना इंक्रीमेंट: हर साल मानदेय में कम से कम 10% की वेतन वृद्धि का प्रावधान हो।
भत्ते और छुट्टियां: नियमित कर्मचारियों की तर्ज पर संविदाकर्मियों को भी महंगाई भत्ता और अवकाश की पात्रता मिले।
सामाजिक सुरक्षा: भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना और परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाए।
संविदा कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वे वार्ता के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन अब खोखले आश्वासनों का समय निकल चुका है। यदि सरकार ने 8 जून से पहले आदेश जारी नहीं किए, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पूरी तरह ठप करने की दिशा में आगे बढ़ जाएगा।









