सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है और हर ओर हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई देते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक एवं पूजन करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. हालांकि पूजा के समय कुछ नियमों का पालन करना और कुछ वस्तुओं से बचना भी जरूरी माना गया है.
शिव पूजा के दौरान किन बातों का रखें विशेष ध्यान
भगवान शिव को पूजा में हर वस्तु अर्पित नहीं की जाती. इसलिए पूजा करते समय कुछ फूल और सामग्री चढ़ाने से बचना चाहिए. केतकी, केवड़ा, जूही, कुंद, शिरीष, कदंब, सेमल, अनार, कनेर, कमल, कपास, बहेड़ा, कैथ सहित लाल रंग के फूल शिवलिंग पर अर्पित नहीं किए जाते. इसी प्रकार तुलसी के पत्ते, हल्दी, मेहंदी, नारियल का पानी, सिंदूर, कुमकुम, रोली तथा शंख या शंख से जल अर्पित करना भी वर्जित माना गया है. इन नियमों का पालन करने से पूजा अधिक शुभ मानी जाती है.
शिवलिंग पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
अभिषेक के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद, शक्कर और गन्ने का रस तैयार रखें. पूजा में कम से कम तीन या ग्यारह बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, आंकड़े के फूल, सफेद चंदन, भस्म, अक्षत, धूप, दीपक और प्रसाद के रूप में फल या मिठाई शामिल करें. पूजा की सभी सामग्री को पहले एक स्वच्छ पात्र में व्यवस्थित कर लें.
सावन में शिवलिंग पूजा की सही विधि
श्रावण मास में किसी भी दिन, विशेष रूप से सोमवार या शुक्रवार की सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थान को साफ करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए सभी सामग्री अपने सामने रखें. इसके बाद एक पात्र में जल भरें और चंदन, धूप, घी का दीपक तथा अन्य पूजन सामग्री तैयार करें.
अब नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करते हुए पूरी पूजा सामग्री पर जल छिड़ककर उसे पवित्र करें.
अपक्रामन्तु भूतानि पिशाचाः सर्वतो दिशा. सर्वेषामवरोधेन ब्रह्मकर्म समारभे..
अपसर्पन्तु ते भूताः ये भूताः भूमिसंस्थिताः. ये भूता विनकर्तारस्ते नष्टन्तु शिवाज्ञया..
शिवलिंग पर जल अर्पित करने का मंत्र
सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल चढ़ाएं और यह मंत्र बोलें.
गंगा सिन्धुश्य कावेरी यमुना च सरस्वती. रेवा महानदी गोदा अस्मिन् जले सन्निधौ कुरु..
अक्षत अर्पित करने का मंत्र
जल अर्पित करने के बाद अक्षत चढ़ाते समय यह मंत्र पढ़ें.
क्क अक्षन्नमीमदन्त ह्यव प्रिया ऽअधूड्ढत. अस्तोड्ढत स्वभानवोव्विप्प्रान विष्ट्ठयामती योजान्विन्द्रते हरी..
पुष्प अर्पित करने का मंत्र
अब भगवान शिव को उपयुक्त पुष्प अर्पित करें और यह मंत्र बोलें.
क्क ओषधीः प्रतिमोदध्वं पुष्पवतीः प्रसूवरीः. अष्वाऽइव सजित्वरीर्व्वीरुधः पारयिष्णवः..
चंदन से त्रिपुंड लगाने का मंत्र
शिवलिंग पर सफेद चंदन से त्रिपुंड बनाते समय इस मंत्र का जाप करें.
क्क भूः भुर्वः स्वः क्क द्द्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम् पुष्टि वर्धनम् उर्व्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामुतः..
बेलपत्र अर्पित करते समय मंत्र
अब श्रद्धापूर्वक बेलपत्र अर्पित करें और यह मंत्र पढ़ें.
काशीवास निवासिनाम् कालभैरव पूजनम्. कोटिकन्या महादानम् एक बिल्वं समर्पणम्..
दर्षनं बिल्वपत्रस्य स्पर्षनं पापनाशनम्. अघोर पाप संहार एकबिल्वं शिवार्पणम..
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्. त्रिजन्मपाप संहारं एकबिल्वं शिवार्पणम..
अभिषेक के समय पढ़ें यह मंत्र
अब शिवलिंग का जलाभिषेक करते हुए यह मंत्र बोलें.
गंगोत्तरी वेग बलात् समुद्धृतं सुवर्ण पात्रेण हिमांषु. शीतलं सुनिर्मलाम्भो ह्यमृतोपमं जलं गृहाण काशीपति भक्त वत्सल..
पूजा के अंत में करें क्षमा प्रार्थना
पूजा पूर्ण होने के बाद भगवान शिव से अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगें और यह प्रार्थना करें.
अपराधो सहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निषं मया, दासोऽयमिति माम् मत्वा क्षमस्व परमेश्वर. आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनं पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर. मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर, यत्पूजितं मया देव परिपूर्ण तदस्तु मे..
श्रद्धा, विश्वास और शुद्ध मन से की गई शिव उपासना को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. यदि पूजा के दौरान नियमों का पालन किया जाए और पूरी निष्ठा के साथ भगवान शिव का स्मरण किया जाए, तो सावन का यह पावन समय आध्यात्मिक शांति, सुख और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है.







