नई दिल्ली/खबर डिजिटल/ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 24 सितंबर को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूचियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में ‘वोट चोरी’ के जरिए जनादेश को प्रभावित किया गया और दावा किया कि इस पूरे मामले का असर लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर पड़ रहा है।
चुनावी नतीजों को लेकर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के चुनावी परिणामों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जमीन पर दिखाई देने वाले राजनीतिक माहौल और बाद में सामने आए नतीजों के बीच अंतर नजर आया। उनके मुताबिक, कुछ चुनावी आंकड़ों और प्रक्रियाओं को लेकर विशेषज्ञ स्तर पर भी सवाल उठाए गए हैं। राहुल गांधी ने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ को लेकर भी सवाल किया। उन्होंने दावा किया कि पहले अलग-अलग राज्यों में सत्ता के खिलाफ मतदाताओं का रुझान देखने को मिलता रहा है, लेकिन हाल के चुनावों में उन्हें यह पैटर्न अलग दिखाई दे रहा है।
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ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी निशाने पर लिया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखने में विफल रहा है। उन्होंने ‘वोट चोरी, कानून चोरी और संस्था चोरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता का सीधा संबंध संविधान, कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं की वैधता से है।
कांग्रेस के आरोप, चुनाव आयोग और बीजेपी का अलग पक्ष
राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए ‘वोट चोरी’ तथा चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप राजनीतिक रूप से विवादित हैं। कांग्रेस इन आरोपों को चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुचिता से जोड़ रही है, जबकि चुनाव आयोग ने अपने कामकाज और SIR प्रक्रिया का बचाव किया है। इस मुद्दे पर बीजेपी की ओर से भी कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए जवाब दिया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में मतदाता के वोट की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और इसी आधार पर उन्होंने चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई।
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