नेपाल में तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने बड़े इलाके में भारी तबाही मचा दी है. बुधवार को तिब्बत-नेपाल सीमा से करीब 20 किलोमीटर ऊपर ग्लेशियर टूटने के बाद पानी और मलबे का तेज बहाव कई इलाकों तक पहुंच गया. रसुवा, धादिंग, नुवाकोट, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी और चितवन समेत कई क्षेत्र इस आपदा से प्रभावित हुए हैं. मलबे और बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है.
इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 469 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं.
910 लोगों से नहीं हो पा रहा संपर्क
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDRRMA के ताजा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 910 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है. इनमें 517 विदेशी पर्यटक शामिल हैं. लापता लोगों में नेपाल में मौजूद करीब 290 भारतीय नागरिक भी बताए जा रहे हैं.
वहीं, एक दूसरी रिपोर्ट में लापता लोगों की संख्या करीब 1,400 बताई गई है. नेपाल सरकार ने अभी तक मृतकों की राष्ट्रीयता से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मृतकों में कितने भारतीय नागरिक शामिल हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 54 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 290 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी है.
तिब्बत में 558 लोग लापता
चीन की ओर से भी बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है. चीनी अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार सुबह तक तिब्बत में 558 लोग लापता बताए गए थे. हालांकि, बीजिंग ने अभी तक लापता लोगों की राष्ट्रीयता से जुड़ा विवरण जारी नहीं किया है. ऐसे में यह साफ नहीं है कि इनमें कितने भारतीय या दूसरे देशों के नागरिक हैं. तिब्बत में करीब 200 भारतीयों के फंसे होने की खबर भी सामने आई है.
टूटे पुल और हाईवे ने बढ़ाई मुश्किल
चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग और नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने प्रभावित इलाकों का जायजा लिया. बाढ़ के कारण 20 से ज्यादा पुल और करीब 40 किलोमीटर हाईवे बह गए हैं. राहत अभियान में हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है और नेपाल ने 13,295 सुरक्षाकर्मियों को बचाव कार्य में लगाया है.
चीन की ओर से भी 141 बचावकर्मी अभियान में शामिल हैं. रेडक्रॉस के मुताबिक कई गांव पूरी तरह तबाह हो चुके हैं. सड़क और पुल टूटने से प्रभावित क्षेत्रों का संपर्क दूसरे इलाकों से कट गया है, जिससे राहत सामग्री पहुंचाना बचाव टीमों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.






