अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं या रेलवे स्टेशन पर अक्सर जाते हैं, तो सफाई से जुड़े नए नियम आपके लिए जानना जरूरी है. रेलवे ने स्टेशन और ट्रेनों में गंदगी फैलाने समेत सफाई व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर जुर्माने की रकम बढ़ा दी है. अब ऐसे मामलों में अधिकतम ₹1,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. पहले इसकी सीमा ₹500 थी.
24 अगस्त से लागू हुए नए नियम
रेल मंत्रालय ने 24 अगस्त को इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके तहत Indian Railways के साल 2012 में बनाए गए सफाई संबंधी नियमों में संशोधन किया गया है. नए नियमों को Indian Railways (Penalties for Activities Affecting Cleanliness at Railway Premises) Amendment Rules, 2026 नाम दिया गया है. नोटिफिकेशन के राजपत्र में प्रकाशित होते ही ये नियम लागू हो गए.
किन हरकतों पर लगेगा ₹1,000 का जुर्माना
रेलवे परिसर या ट्रेन में कूड़ा-कचरा फेंकना अब जेब पर भारी पड़ सकता है. यात्रियों को स्टेशन, रेलवे परिसर या कोच के अंदर केवल निर्धारित स्थानों पर ही कचरा डालना होगा.
इसके अलावा रेलवे परिसर में बिना निर्धारित सुविधा के खाना बनाना, नहाना, थूकना, पेशाब करना, शौच करना, जानवरों या पक्षियों को खाना खिलाना और कपड़े, बर्तन या वाहन धोना भी नियमों के खिलाफ है.
रेलवे की संपत्ति पर बिना अनुमति पोस्टर लगाना, कुछ लिखना या चित्र बनाना भी कार्रवाई के दायरे में आता है. रेलवे की किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या उसे गंदा करने पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है.
जुर्माना नहीं भरा तो क्या होगा
अगर कोई व्यक्ति निर्धारित जुर्माना जमा नहीं करता है, तो उसे संबंधित क्षेत्राधिकार वाली सक्षम अदालत के सामने पेश किया जा सकता है. अदालत इस मामले में ₹2,000 तक का जुर्माना लगा सकती है.
जुर्माना वसूलने का अधिकार किसे है
नियमों को लागू करने और जुर्माना वसूलने की जिम्मेदारी रेलवे के अधिकृत अधिकारियों को दी गई है. इनमें स्टेशन मास्टर या स्टेशन मैनेजर, कमर्शियल विभाग के टिकट कलेक्टर, ऑपरेटिंग विभाग के समान स्तर के अधिकारी और रेलवे प्रशासन द्वारा अधिकृत अन्य कर्मचारी शामिल हैं.
वेंडर्स को भी रखना होगा सफाई का ध्यान
रेलवे परिसर में काम करने वाले अधिकृत वेंडर्स और हॉकरों के लिए भी सफाई से जुड़े नियम तय किए गए हैं. उन्हें कचरा जमा करने के लिए डस्टबिन या उचित कंटेनर रखना होगा और इकट्ठा हुए कचरे का सही तरीके से निपटान सुनिश्चित करना होगा.
पीने के पानी की व्यवस्था पर भी रेलवे का फोकस
इसी बीच रेलवे ने 24 अगस्त से स्टेशनों पर पेयजल टैंकों और फिल्ट्रेशन सिस्टम की सफाई और डिसइंफेक्शन के लिए विशेष अभियान भी शुरू किया है. इस दौरान पानी के स्रोत, फिल्ट्रेशन प्लांट, अंडरग्राउंड और ओवरहेड टैंक, पानी के बूथ, नल और अन्य डिस्पेंसिंग पॉइंट्स की जांच की जाएगी.
टैंकों को खाली करके उनकी सफाई और सैनिटाइजेशन किया जाएगा. पाइपलाइन, फिल्टर और टैंकों में खराबी या लीकेज मिलने पर उन्हें ठीक किया जाएगा. वाटर कूलर, UV/RO सिस्टम और Water Vending Machines की भी जांच और मेंटेनेंस किया जाएगा. इसका मकसद यात्रियों को साफ और सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराना है.







