भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए हैं। दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष की चिंताएं बढ़ी हैं और SIR प्रक्रिया ने इन सवालों को और तेज किया है।
मीडिया रिपोर्टों का दिया हवाला
दिग्विजय सिंह का यह बयान उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाता सूची से नाम हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी डेटाबेस के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
दिग्विजय सिंह ने लगाए गंभीर आरोप
दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के बाद चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग भाजपा के संगठन की तरह काम कर रहा है और SIR की प्रक्रिया ने इस धारणा को और मजबूत किया है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया गया।
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रिपोर्ट में 14 बार आपत्ति का दावा
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के अनुसार, चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। रिपोर्ट में मतदाता सूची से नाम हटाने, नए मतदाताओं को जोड़ने और चुनावी डेटा तक पहुंच एवं उसके प्रबंधन जैसे मुद्दों पर दोनों आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।
चुनाव आयोग ने रिपोर्ट के दावे को किया खारिज
हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों से जुड़े इन दावों को अलग तरीके से पेश किया है। आयोग के सूत्रों ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों की अलग-अलग मुद्दों पर राय या आपत्तियां होना आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR सहित चुनाव आयोग के सभी अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं। चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि चुनाव आयुक्तों की ओर से किसी मुद्दे पर अलग राय व्यक्त करना अंतिम निर्णय पर असहमति के समान नहीं है। आयोग के मुताबिक, बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में आंतरिक जांच और संतुलन सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
आने वाले चुनावों का मुद्दा?
इस तरह SIR को लेकर राजनीतिक आरोपों के बीच एक तरफ दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आई है, वहीं चुनाव आयोग ने अंतिम फैसलों में किसी मतभेद से इनकार करते हुए सभी निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है। फिर भी कहा जा रहा है कि मुद्दा आने वाले चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।
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