मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र आत्मनिर्भर राज्य बनने की ओर अग्रसर है। एक समय था जब मध्यप्रदेश को बिजली संकट से जूझने वाले राज्यों में गिना जाता था, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। मध्यप्रदेश अब केवल अपनी जरूरत की बिजली पूरी करने वाला राज्य नहीं, बल्कि बिजली उत्पादन में सरप्लस राज्य बनकर देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य ने जिस गति से प्रगति की है, उसने मध्यप्रदेश को भारत के ऊर्जा मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है।
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई इबारत लिखी है। सरकार का लक्ष्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और देश का अग्रणी राज्य बनाना है। जानकारी के मुताबिक वर्तमान में मध्यप्रदेश की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 33 हजार मेगावाट से अधिक है। राज्य की उत्पादन क्षमता उसकी मांग से अधिक होने के कारण अब मध्यप्रदेश सरप्लस बिजली वाला राज्य बनकर उभरा है। यही कारण है कि मध्यप्रदेश अन्य राज्यों को भी बिजली उपलब्ध कराने की स्थिति में है।
किस जिले में कितने सोलर प्लांट
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश तेजी से विस्तार कर रहा है। राज्य के कई जिले अब सोलर हब के रूप में उभर रहे हैं।
रीवा : 750 मेगावाट का अल्ट्रा मेगा सोलर प्रोजेक्ट, जिसने मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
नीमच : 500 मेगावाट का विशाल सोलर पार्क हाल ही में शुरू किया गया है।
शाजापुर : 450 मेगावाट का बड़ा सोलर पार्क विकसित किया गया है।
खंडवा (ओंकारेश्वर) : देश की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं में से एक लगभग 270 मेगावाट क्षमता के साथ संचालित है।
मुरैना : सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना विकसित की जा रही है।
आगर मालवा : सोलर और विंड हाइब्रिड परियोजनाओं का प्रमुख केंद्र बन रहा है। इसके अलावा धार, अशोकनगर, भिंड, शिवपुरी और सागर जिलों में हजारों मेगावाट क्षमता की नई परियोजनाओं के लिए भी भूमि चिन्हित की जा चुकी है। जो कि अभी पाइपलाइन में है।
राज्य में वर्तमान सौर क्षमता लगभग 5 हजार मेगावाट से अधिक हो चुकी है और आने वाले वर्षों में इसे और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने 2035 तक 33 हजार मेगावाट सौर क्षमता विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सौर ऊर्जा की नई उड़ान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई उड़ान भरी है। राज्य सरकार ने नई सौर नीति लागू की है, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया है बड़े पैमाने पर भूमि उपलब्ध कराई है। हाल ही में नीमच और शाजापुर के 950 मेगावाट क्षमता वाले सोलर पार्कों का लोकार्पण इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार की योजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। सोलर परियोजनाओं के माध्यम से रोजगार सृजन, उद्योगों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना तथा कार्बन उत्सर्जन को कम करना भी इस नीति का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
आज मध्यप्रदेश यह साबित कर रहा है कि यदि दूरदर्शी नेतृत्व, स्पष्ट नीति और मजबूत इच्छाशक्ति हो तो ऊर्जा आत्मनिर्भरता केवल सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन सकती है। कोयले और परंपरागत ऊर्जा पर निर्भरता घटाते हुए मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा के माध्यम से विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में जब देश हरित ऊर्जा की ओर बढ़ेगा, तब मध्यप्रदेश केवल एक सहभागी राज्य नहीं होगा, बल्कि इस परिवर्तन का नेतृत्व करने वाले राज्यों में सबसे आगे खड़ा दिखाई देगा।
लेखक - हृदेश कुमार धारवार, स्वत्रंत पत्रकार हैं।







