श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा 12 से 18 अक्टूबर, 2026 तक 'अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव' का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रतिष्ठित उत्सव के अंतर्गत “अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक सम्मेलन - अध्यात्म, मर्यादा और सुशासनः श्रीराम दर्शन का वैश्विक समागम” का आयोजन 12 से 14 अक्टूबर, 2026 तक रवीन्द्र भवन, भोपाल में आयोजित किया जा रहा है।
सम्मेलन में श्रीराम के जीवन-दर्शन, आदर्शों, रामायण की वैश्विक परंपरा एवं उसके सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं ऐतिहासिक प्रभावों पर देश-विदेश के शोधार्थियों एवं अध्येताओं के साथ बौद्धिक विमर्श किया जाएगा।
संचालक, संस्कृति एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास श्री एन.पी. नामदेव ने बताया कि सम्मेलन के लिए शोधार्थियों एवं अध्येताओं के शोध आलेख एवं प्रमाणित शोध कार्य आमंत्रित किए जा रहे हैं। चयनित शोध कार्यों का समिति द्वारा परीक्षण एवं चयन किया जाएगा एवं उपयुक्त शोध आलेखों को सम्मेलन के उपरांत संगोष्ठी पुस्तिका के रूप में प्रकाशित किया जा सकेगा। प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जा सकेंगे। सहभागिता के लिए गूगल फॉर्म के माध्यम से पंजीयन की व्यवस्था की गई है, जिसके लिए संस्कृति विभाग की आधिकारिक वेबसाइट culturemp.in पर दिए गए लिंक के माध्यम से पंजीयन किया जा सकेगा।
सम्मेलन में शोध एवं विमर्श के लिए रामराज्य की संकल्पना, श्रीराम का आदर्श नेतृत्व एवं सुशासन, रामायणकालीन औषधियां, वनस्पतियां एवं जल संरचनाएं, लोककथाओं में श्रीराम, वाल्मीकि, तुलसी एवं अन्य रामकाव्य का समालोचनात्मक अध्ययन, वैश्विक रामकथाएं एवं परंपराएं प्रमुख विषय होंगे।
इसके साथ ही आधुनिक लेखन, चित्रपट एवं कलाओं में श्रीराम, पुरातत्व, मंदिर एवं अभिलेखों में श्रीराम, रामायणकालीन वास्तुकला, अभियांत्रिकी, आयुध एवं विमानन प्रणाली, श्रीराम एवं सामाजिक समरसता, दक्षिण-पूर्व एशिया से विश्व की साझा विरासत के रूप में रामकथा, राजनीतिक दृष्टि एवं रामायण तथा लंका में रामायण के प्रभाव जैसे विषयों पर भी शोध आलेख आमंत्रित किए गए हैं।
शोध आलेख 12 अक्टूबर, 2026 को रात्रि 12 बजे तक स्वीकार किए जाएंगे। सम्मेलन का उद्देश्य श्रीराम के व्यापक दर्शन, रामायण की बहुआयामी परंपरा और उसके वैश्विक सांस्कृतिक प्रभावों पर प्रमाण-आधारित, गंभीर एवं सार्थक बौद्धिक संवाद को प्रोत्साहित करना है।







