अहमदाबाद: मंगलवार को 17 देशों के 68 प्रतिभागियों ने एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई), अहमदाबाद में उद्यमिता से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरे किए। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की पहल, भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के तहत किया गया था।
आईटीईसी के तहत आयोजित ये दोनों प्रशिक्षण कार्यक्रम मंगलवार को संपन्न हुए। इनका मुख्य उद्देश्य उद्यमिता से जुड़े कौशल को मजबूत बनाना, असंगठित क्षेत्र के उद्यमों को बढ़ावा देना, व्यावहारिक और सफल व्यावसायिक योजनाएं तैयार करना तथा आजीविका के टिकाऊ साधनों को प्रोत्साहित करना था। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभागियों को उद्यम विकास के ऐसे व्यावहारिक तरीके सिखाए गए, जिन्हें वे अपने-अपने देशों की आर्थिक परिस्थितियों और संस्थागत व्यवस्थाओं के अनुसार अपना सकते हैं।
असंगठित क्षेत्र के उद्यम, उद्यमिता और स्थानीय आर्थिक विकास पर केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बांग्लादेश, इथियोपिया, घाना, इराक, माली, नामीबिया, नाइजीरिया, श्रीलंका, तंजानिया, युगांडा, वेनेजुएला और जिम्बाब्वे से कुल 33 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 19 पुरुष और 14 महिलाएं शामिल थीं।
इस कार्यक्रम में स्थानीय स्तर पर व्यावसायिक अवसरों की पहचान करने, उपलब्ध संसाधनों और मूल्य श्रृंखलाओं का आकलन करने तथा उत्पादों का मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता में सुधार, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों ने समुदाय आधारित उद्यमों, स्वयं सहायता समूहों और क्लस्टर आधारित व्यावसायिक मॉडलों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। भारत के स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (एसवीईपी) को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया, ताकि प्रतिभागी समझ सकें कि उद्यमिता प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता तक पहुंच और समुदाय आधारित सहयोग के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्यमों को किस तरह बढ़ावा दिया जा सकता है।
दूसरे प्रशिक्षण कार्यक्रम, उद्यमिता विकास और कौशल उन्नयन में बांग्लादेश, इथियोपिया, इराक, लाइबेरिया, माली, मॉरीशस, मोजाम्बिक, नाइजीरिया, सेशेल्स, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, तंजानिया, युगांडा और जिम्बाब्वे से कुल 35 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 15 पुरुष और 20 महिलाएं शामिल थीं।
दो सप्ताह के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्यावसायिक अवसरों की पहचान, बाजार अनुसंधान, व्यवसाय की व्यावहारिकता का आकलन, व्यावसायिक योजना तैयार करना, परियोजना की लागत का आकलन और वित्तीय योजना बनाने जैसे विषय शामिल थे। प्रतिभागियों ने डिजिटल मार्केटिंग, नए ग्राहक जोड़ने, उत्पादों की कीमत तय करने और व्यवसाय की आर्थिक व्यवहार्यता के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। व्यावहारिक प्रशिक्षण के तहत बिजनेस मॉडल कैनवास तैयार करना, स्टार्टअप उद्यमियों के साथ बातचीत, उद्योगों और उत्पादन इकाइयों का दौरा, निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित अभ्यास तथा उद्यम स्थापित करने और कौशल उन्नयन के लिए व्यक्तिगत कार्ययोजनाएं तैयार करना शामिल था।
“उद्यमिता के विकास के लिए स्थानीय अर्थव्यवस्था में उपलब्ध अवसरों की पहचान करने की क्षमता के साथ-साथ उन अवसरों को सफल व्यवसायों में बदलने के लिए जरूरी कौशल होना भी आवश्यक है। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभागियों को बाजार का आकलन करने, मूल्य श्रृंखला विकसित करने, व्यावसायिक योजनाएं बनाने और वित्तीय प्रबंधन के बारे में व्यावहारिक जानकारी मिलती है। इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान उन्हें अपने-अपने देशों की परिस्थितियों के अनुसार उद्यम विकास और आजीविका के टिकाऊ साधन विकसित करने के उपयुक्त तरीके तलाशने में मदद कर सकता है,” ईडीआईआई के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला ने कहा।
ईडीआईआई वर्ष 2000–01 से विदेश मंत्रालय के भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है और इसके तहत अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के लिए उद्यमिता को बढ़ावा देने से संबंधित क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करता आ रहा है। यह पहल विभिन्न देशों के प्रतिभागियों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देती है और उनके उद्यमिता संबंधी कौशल और क्षमताओं को मजबूत बनाने में मदद करती है।







