MP News: पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा सरपंचों का मासिक मानदेय बढ़ाकर सीधे 10 हजार रुपये किए जाने के बाद मध्य प्रदेश के ग्रामीण सरपंचों में भी बड़ी आस जगी थी। सूबे के 23 हजार से अधिक सरपंचों को उम्मीद थी कि मोहन यादव सरकार भी उनका मानदेय बढ़ाएगी। हालांकि, मध्य प्रदेश विधानसभा से आए जवाब ने सरपंचों की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया है। वर्तमान में मध्य प्रदेश की पंचायतों को संभालने वाले सरपंचों को प्रतिमाह केवल 4,250 रुपये का मानदेय दिया जाता है, जिसे बढ़ाने से सरकार ने साफ तौर पर इनकार कर दिया है।
विपक्ष की 15 हजार की मांग
कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने पंचायत विभाग से बड़ी मांग की है। उन्होंने दलील दी कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में मात्र 4250 रुपये में कोई भी सरपंच या वार्ड पंच अपने परिवार की आजीविका नहीं चला सकता। उन्होंने इसे बढ़ाकर न्यूनतम 15 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग उठाई थी।
पंचायत मंत्री का जवाब
कांग्रेस विधायक की मांग पर प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने साफ शब्दों में कहा कि सरपंच और पंच का चुनाव कोई भी व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से समाज सेवा के उद्देश्य से लड़ता है, न कि अपने परिवार की आजीविका चलाने के लिए। जिसके बाद से प्रदेश भर के सरपंच संगठनों में असंतोष देखा जा रहा है। पंचायत मंत्री ने लिखित तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल मध्य प्रदेश सरकार के पास मानदेय वृद्धि को लेकर कोई भी नया प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
सरपंचों का तर्क
दूसरी ओर, ग्राम सरपंचों का कहना है कि पंचायत स्तर पर करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की जिम्मेदारी, बैठकों में भागीदारी और जनता की चौबीस घंटे की समस्याओं का निराकरण करने में उनकी कमान सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में वर्तमान मानदेय उनके साथ बड़ा मजाक है।







