मनोज नामदेव, सिवनी। जिले के घंसौर क्षेत्र में रेलवे दोहरीकरण परियोजना के तहत प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसी सिलसिले में घंसौर के लगभग 300 ग्रामीण एकजुट होकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे और प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने मांग की है कि रेलवे निर्माण कार्य के लिए खाली पड़ी भूमि का उपयोग किया जाए, ताकि घने आबादी क्षेत्रों को बचाया जा सके।
आबादी क्षेत्र को बचाने की गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि वे क्षेत्र के विकास और रेल सुविधाओं के विस्तार के खिलाफ नहीं हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि रेलवे दोहरीकरण देश और क्षेत्र की प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान स्थानीय नागरिकों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। ग्रामीणों के अनुसार, इस परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण की वर्तमान प्रक्रिया से घंसौर क्षेत्र के लगभग 500 परिवारों के प्रभावित होने की आशंका है। इतने बड़े पैमाने पर रिहायशी जमीनों के अधिग्रहण से लोगों के सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो सकता है, जिसे लेकर ग्रामीणों में गहरी चिंता बनी हुई है।

खाली भूमि के उपयोग की मांग
एसडीएम कार्यालय को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने विशेष रूप से यह आग्रह किया है कि प्रशासन और रेलवे विभाग को वैकल्पिक रास्तों और खाली पड़ी जमीनों पर विचार करना चाहिए। यदि रेलवे लाइन के निर्माण के लिए आसपास उपलब्ध रिक्त भूमि का उपयोग किया जाता है, तो रिहायशी क्षेत्रों को तहस-नेहस होने से बचाया जा सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस संवेदनशील मुद्दे पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और प्रभावित होने वाले परिवारों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए एक व्यावहारिक समाधान निकालने की पुरजोर अपील की है।
प्रशासन के अगले कदम पर टिकी ग्रामीणों की निगाहें
इस ज्ञापन सौंपने के बाद अब घंसौर के प्रभावित परिवारों की निगाहें पूरी तरह से जिला प्रशासन और रेलवे अधिकारियों के आगामी निर्णयों पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों को पूरी उम्मीद है कि उनकी इस जायज और न्यायसंगत मांग पर प्रशासन गंभीरता से विचार करेगा। वे चाहते हैं कि रेलवे दोहरीकरण का विकास कार्य भी सुचारू रूप से आगे बढ़े और साथ ही आबादी क्षेत्र में पीढ़ियों से रह रहे आम नागरिकों के आशियानों व हितों की भी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।







