उज्जैन में शाही मस्जिद हटाने को लेकर बवाल, पथराव के बाद पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
मध्य प्रदेश के उज्जैन में साल 2028 के सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है. कंठाल चौराहे से लेकर गोपाल मंदिर के बीच सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है, जिसकी जद में आने वाले निर्माणों को हटाया जाना है. इसी कार्रवाई के दौरान सोमवार को शाही मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया के बीच अचानक माहौल गरमा गया. जानकारी के मुताबिक मुस्लिम समाज के लोग खुद ही मस्जिद के कुछ हिस्से को हटा रहे थे, लेकिन इसी दौरान कुछ महिलाओं ने विरोध जताते हुए सड़क जाम कर दी. इसके बाद देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और उपद्रवियों ने पुलिस टीम पर पथराव कर दिया. इस पथराव में थाना प्रभारी पुष्पा पांचाल चोटिल हो गईं, जिसके बाद स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े.
100 साल पुरानी मस्जिद और ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला
दूसरी तरफ इस विवाद को लेकर मस्जिद प्रबंधन ने अपना पक्ष रखा है. उनका दावा है कि यह शाही मस्जिद 100 साल से भी ज्यादा पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है. अपने दावे को साबित करने के लिए प्रबंधन ने सिंधिया रियासत के दौर के कागजात भी दिखाए हैं. उनका कहना है कि 17 मार्च 1925 के दस्तावेजों में स्पष्ट लिखा था कि जमीन अधिग्रहण के बाद मस्जिद के बाकी हिस्से को सुरक्षित रखा जाएगा. इसके बाद साल 1975 में भी रास्ते और ट्रैफिक की सहूलियत के लिए मस्जिद की कुछ जमीन दी गई थी. इतना ही नहीं, 13 सितंबर 1985 के मध्य प्रदेश शासन के गजट नोटिफिकेशन में भी इस मस्जिद और इसके रकबे का पूरा जिक्र है.
भारी पुलिस बल तैनात, इलाके में पसरा तनाव
सड़क पर हुए अचानक बवाल और पथराव की घटना के बाद पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. पुलिस प्रशासन भीड़ को हटाने और इलाके में शांति कायम करने में जुटा हुआ है. मौके पर वरिष्ठ अधिकारी मुस्तैद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, हालांकि इलाके में अब भी भारी तनाव बना हुआ है.







