सतना/अंकित शर्मा/खबर डिजिटल/ जिले की नागौद जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत रहिकवारा में सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने श्रमिक परिवारों को आर्थिक सहायता देने वाली 'संबल योजना' में जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित कर लाखों रुपए की अंत्येष्टि और अनुग्रह राशि गबन कर ली है।इस बड़े फर्जीवाड़े में ग्राम पंचायत के तत्कालीन सचिव, पंचायत समन्वयक अधिकारी (पीसीओ) और यहां तक कि जनपद पंचायत के सीईओ की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
मरे हुए लोग निकले जिंदा
जनसुनवाई के माध्यम से कलेक्टर को मिली शिकायत के अनुसार, अधिकारियों की मिलीभगत से योजना की राशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है। धांधली के दो मुख्य मामले सामने आए हैं। रहिकवारा पंचायत के सज्जन चौधरी को 10 जनवरी 2021 को मृत दर्शाया गया और उनके नाम पर 5,000 रुपए की अंत्येष्टि राशि और 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि निकाल ली गई। चौंकाने वाली बात यह है कि सज्जन चौधरी आज भी पूरी तरह से जीवित हैं। इसी तरह, गनपत कुशवाहा को भी मृत घोषित कर 14 जनवरी 2020 को 5,000 रुपए की अंत्येष्टि और 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि आहरित कर ली गई, जबकि वह भी जीवित पाए गए हैं।
मृतक परिवार को भी नहीं मिली राशि
फर्जीवाड़े का एक तीसरा मामला रामचरण चौधरी का है, जिनकी वास्तविक मृत्यु 12 अप्रैल 2020 को हुई थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उनकी मृत्यु के बाद भी, नियमानुसार मिलने वाली सहायता राशि उनके परिवार को न देकर किसी 'अन्य व्यक्ति' के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
ग्रामीणों ने की एफआईआर की मांग
ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण को सरकारी धन की हेराफेरी बताया है और मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ न सिर्फ विभागीय कार्रवाई, बल्कि कानूनी कार्रवाई और अपराध पंजीबद्ध करने की भी मांग की है।
अधिकारियों ने दिया जांच का आश्वासन
इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेन्द्र सिंह ने पुष्टि की है कि जनसुनवाई में शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि जांच में गलती पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि यदि अन्य पंचायतों से भी ऐसे मामले सामने आते हैं, तो उनकी भी जांच की जाएगी।







