रीवा/अरविन्द तिवारी/खबर डिजिटल/ मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। रविवार को प्रदर्शनकारियों ने बांस के सहारे फांसी के फंदे तैयार किए और गले में फंदा डालकर विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन, आजीविका और भविष्य से जुड़े सवालों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जल-जंगल-जमीन बचाने की मांग
रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित परमाणु बिजली संयंत्र को लेकर स्थानीय आदिवासी और ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को आशंका है कि प्लांट बनने से उनके जल स्रोतों, जंगलों, जमीन और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आजीविका जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है, इसलिए परियोजना को लेकर उनकी चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए।
महिला की मौत के बाद बढ़ा आक्रोश
जल सत्याग्रह के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की मौत के बाद आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ गई है। इस घटना को लेकर मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। महिला की मौत के बाद प्रस्तावित न्यूक्लियर प्लांट के विरोध ने भी जोर पकड़ लिया है।
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मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
रविवार को फंदे के जरिए विरोध प्रदर्शन कर ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचने की कोशिश की। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रशासन की भूमिका बनी अहम
अब इस मामले में प्रशासन की भूमिका अहम मानी जा रही है। ग्रामीणों की मांगों, पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं और परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर समाधान की दिशा में क्या कदम उठाता है।
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