धर्मराज सिंह, राजगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की 'सत्य सनातन यात्रा' पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की टिप्पणियों के बाद विवाद गहरा गया है। इस दौरान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह ने भाजपा विधायक हजारीलाल दांगी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने दांगी के कांग्रेस कार्यकाल के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष और विधायक रहने की अवधि पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए। हालांकि, उनके इस बयान से राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है और कांग्रेस के पुराने शासनकाल पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
बयानों की जंग में दांगी पर तीखे हमले
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राजगढ़ से भाजपा विधायक अमर सिंह यादव और खिलचीपुर विधायक हजारीलाल दांगी ने दिग्विजय सिंह की धार्मिक यात्रा तथा उनके मुख्यमंत्री काल पर तंज कसे। इसके जवाब में प्रियव्रत सिंह ने मोर्चा संभालते हुए दांगी के राजनीतिक इतिहास को कटघरे में खड़ा कर दिया।
प्रियव्रत सिंह ने आरोप लगाया कि हजारीलाल दांगी जब कांग्रेस में थे, तब उन्होंने पांच साल जिला पंचायत अध्यक्ष और पांच साल विधायक के रूप में काम किया। इस अवधि में उन्होंने जमकर भ्रष्टाचार किया और बाद में अपनी राजनीतिक निष्ठा बदल ली। प्रियव्रत के इन बयानों ने जिले में नई बहस छेड़ दी है।
कांग्रेस के पूर्व शासनकाल पर उठते सवाल
प्रियव्रत सिंह के आरोपों के बाद राजनीतिक हलकों में पलटवार शुरू हो गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब दांगी जिला पंचायत अध्यक्ष और विधायक थे, तब प्रदेश में दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी।
यदि उस दौरान भ्रष्टाचार हुआ था, तो तत्कालीन सरकार ने जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की? इसके अलावा, यदि दांगी का कार्यकाल विवादित था, तो पार्टी ने उन्हें दोबारा विधानसभा का टिकट किस आधार पर दिया था? हालांकि, इन दावों से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज या स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
जवाबदेही और साख पर टिकी निगाहें
इस जुबानी जंग ने भाजपा को कांग्रेस के शासनकाल पर उंगली उठाने का सीधा मौका दे दिया है। वहीं, कांग्रेस के सामने अपने दावों के समर्थन में पुख्ता सबूत पेश करने की चुनौती है। अब देखना होगा कि दोनों दल इस मुद्दे को किस दिशा में ले जाते हैं और संबंधित नेता इन सवालों का क्या जवाब देते हैं।







