भोपाल। मध्यप्रदेश में जनगणना 2027 की तैयारियों को गति देने के लिए राज्य-स्तरीय समन्वय समिति (SLCCC) की द्वितीय बैठक मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में जनगणना के कुशल प्रबंधन, डिजिटल तकनीक के उपयोग और विभागीय समन्वय को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।
देश की पहली डिजिटल जनगणना
बैठक के दौरान जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा प्रस्तुतिकरण के जरिए बताया गया कि जनगणना 2027 देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। इसमें मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्रित किया जाएगा, जबकि निगरानी और प्रबंधन वेब पोर्टल द्वारा किया जाएगा। इस बार आम नागरिकों के लिए स्व-गणना की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे लोग स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। केंद्र सरकार इस वृहद अभियान के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
फील्ड वर्क की सफलता
निदेशक, जनगणना कार्य ने बताया कि इस राष्ट्रीय कार्य को पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश में लगभग 2 लाख जानकारी एकत्र करने वाले और पर्यवेक्षकों की आवश्यकता होगी। इससे पहले, जनसंख्या गणना के द्वितीय चरण के पूर्व परीक्षण को जुलाई 2026 में सिवनी जिले की कुरई तहसील के चयनित गांवों और ग्वालियर नगर निगम के चयनित वार्डों में सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा चुका है।
मुख्य सचिव के कड़े निर्देश
मध्यप्रदेश में जनगणना का द्वितीय चरण (जनसंख्या की गणना) जनवरी-फरवरी 2027 में आयोजित होगा। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए:
- परीक्षा समय-सारणी: स्कूल शिक्षा विभाग 2027 की परीक्षाओं का शेड्यूल जनगणना तिथियों के अनुसार ही तय करे।
- स्थानांतरण व सीमा परिवर्तन पर रोक: जनगणना कार्य पूरा होने तक प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव न किया जाए और जनवरी से मार्च 2027 के बीच तबादलों से बचा जाए।
- डिजिटल प्रशिक्षण व नोडल अधिकारी: ऐप आधारित डेटा संग्रह के लिए अमले को समय पर प्रशिक्षण दिया जाए और सभी संबंधित विभाग अपने-अपने नोडल अधिकारी नामित करें।
- जन-जागरूकता: जनसंपर्क विभाग को स्व-गणना और जनगणना के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने और भ्रांतियों को दूर करने के लिए बड़े प्रचार का जिम्मा सौंपा गया।







