अगर आप 2 अक्टूबर को नया स्मार्टफोन या मोबाइल एक्सेसरीज खरीदने की सोच रहे हैं, तो अपने साथ नकदी यानी कैश ले जाना न भूलें. ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) ने 2 अक्टूबर को 'नो UPI डे' के रूप में मनाने का ऐलान किया है. इस दिन देश भर के मोबाइल दुकानदार ऑनलाइन भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे. एसोसिएशन का यह कदम सरकार द्वारा मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने के फैसले के विरोध में उठाया जा रहा है. विरोध जताने के लिए दुकानदार अपने काउंटरों पर लगे UPI क्यूआर कोड को काले कपड़े से ढकेंगे. संगठन का स्पष्ट कहना है कि वे डिजिटल पेमेंट के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि दुकानदारों पर जबरन डाले जा रहे अतिरिक्त खर्च का विरोध कर रहे हैं.
जानिए क्या है नया UPI चार्ज और किन लेन-देन पर पड़ेगा असर
सरकार द्वारा 15 अक्टूबर से लागू किए जा रहे नए नियमों के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत का शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. वहीं रेलवे, टेलीकॉम, पेट्रोल पंप और बीमा जैसे विशेष क्षेत्रों में 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट चार्ज लिया जाएगा. म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से जुड़े भुगतानों पर 0.02 फीसदी का चार्ज लागू होगा. राहत की बात यह है कि आम लोगों के आपसी ट्रांसफर (P2P) और 2,000 रुपये तक की छोटी खरीदारी पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. साथ ही महीने में 1 लाख रुपये तक का यूपीआई कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों को भी इससे छूट दी गई है. सरकार का दावा है कि लगभग 96 फीसदी यूपीआई लेन-देन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे.
मोबाइल दुकानदारों में नाराजगी क्यों? जानिए कितना पड़ेगा वित्तीय बोझ
मोबाइल रिटेल व्यापार में मार्जिन पहले से ही काफी कम होता है. AIMRA के अनुसार, महीने में 5 लाख से 30 लाख रुपये तक का यूपीआई बिजनेस करने वाले दुकानदारों को हर महीने 2,000 से 12,000 रुपये तक का सीधा नुकसान होगा. एसोसिएशन का अनुमान है कि इस नए शुल्क से देश भर के मोबाइल विक्रेताओं पर हर महीने करीब 40 करोड़ रुपये और सालाना लगभग 500 करोड़ रुपये का भारी बोझ आ जाएगा. नियम के मुताबिक व्यापारी यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं वसूल सकते, जिससे उनका मुनाफा घटेगा और कुछ विक्रेता अप्रत्यक्ष रूप से कीमतें बढ़ाकर इसकी भरपाई करने पर मजबूर हो सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली अंतरिम राहत, सरकार और आरबीआई को नोटिस जारी
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई पर लगने वाले इन नए चार्जेस पर तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान केंद्र की तरफ से अदालत को बताया गया कि 96 प्रतिशत लेन-देन इस नए नियम से अप्रभावित हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पूरे विषय को कानूनी से ज्यादा तकनीकी प्रकृति का मामला माना है.







