निवाड़ी के नंदनवारा जलाशय पर खनन का खतरा, गणेश बांध में दरारें आने का दावा… शिव मंदिर पर भी मंडराया संकट

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सुनील बंशीवाल

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निवाड़ी के नंदनवारा जलाशय पर खनन का खतरा, गणेश बांध में दरारें आने का दावा… शिव मंदिर पर भी मंडराया संकट

निवाड़ी/खबर डिजिटल/ मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में ऐतिहासिक नंदनवारा जलाशय (सुधासागर) के गणेश बांध और पहाड़ी पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर के अस्तित्व को लेकर चिंता बढ़ रही है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पहाड़ी पर लंबे समय से हो रहे गौरा पत्थर के खनन और ब्लास्टिंग के कारण पहाड़ में दरारें पड़ रही हैं। इससे बांध की सुरक्षा और शिव मंदिर को नुकसान पहुंचने का खतरा है। ग्रामीणों ने खनन गतिविधियों की जांच कराने और जलाशय को सुरक्षित रखने की मांग उठाई है।

चंदेलकालीन इतिहास से जुड़ा है नंदनवारा जलाशय
नंदनवारा तालाब बुंदेलखंड के ऐतिहासिक जलाशयों में गिना जाता है। मान्यता है कि चंदेल वंश के शासकों ने क्षेत्र में सूखे की समस्या से निपटने के लिए इसका निर्माण कराया था। यह जलाशय दोनों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ है और बारगी नदी पर बांध बनाकर तैयार किया गया था। स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, शुरुआती दौर में बांध का निर्माण दो बार कराया गया, लेकिन नदी के तेज बहाव और पानी के दबाव के कारण दोनों बार बांध टूट गया था। इसके बाद ओरछा रियासत के महाराजा वीर सिंह जू देव प्रथम ने वर्ष 1605 से 1627 के बीच बांध का दोबारा निर्माण कराया। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, इस निर्माण में करीब 22 वर्ष लगे।

गणेश प्रतिमा की स्थापना के बाद पड़ा गणेश बांध नाम
क्षेत्र में प्रचलित जनश्रुति के अनुसार, महाराजा वीर सिंह जू देव बांध के बार-बार टूटने की आशंका से चिंतित थे। वे देवी के भक्त थे और बांध की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते थे। मान्यता है कि उन्हें सपने में बांध पर गणेश प्रतिमा स्थापित करने और वेदी हवन कराने का संकेत मिला। इसके बाद महाराजा की उपस्थिति में गणेश प्रतिमा स्थापित की गई और धार्मिक अनुष्ठान कराया गया। तभी से इस बांध को गणेश बांध के नाम से जाना जाने लगा। बांध के नीचे मकर संक्रांति के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन भी होता है। इस दौरान आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं।

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खनन और ब्लास्टिंग से पहाड़ी में दरारें पड़ने का आरोप
ग्रामीण कल्लू केवट, हरगोविंद अहिरवार और सुक्का केवट सहित अन्य लोगों का आरोप है कि ईस्टन मिनरल कंपनी करीब चार दशकों से गणेश बांध के पास स्थित पहाड़ी पर गौरा पत्थर का खनन कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी पर किए जाने वाले ब्लास्ट से चट्टानों में दरारें पड़ रही हैं। उनका दावा है कि लगातार खनन के कारण पहाड़ी की संरचना कमजोर हो सकती है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि खनन और ब्लास्टिंग इसी तरह जारी रही, तो बांध की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। पहाड़ी के ऊपर बने शिव मंदिर पर भी चट्टानें खिसकने या पहाड़ी का हिस्सा ढहने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, इन आशंकाओं की पुष्टि के लिए संबंधित विभागों की तकनीकी जांच जरूरी है।

84 गांवों की पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका
स्थानीय लोगों के अनुसार, नंदनवारा जलाशय से लगभग 50 गांवों की करीब 3,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। इसके अलावा निवाड़ी जिले के 84 गांवों में पेयजल की व्यवस्था भी इस जलाशय से जुड़ी बताई जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बांध को नुकसान पहुंचता है, तो इससे खेती और पेयजल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि वे जलाशय और आसपास की पहाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

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पर्यटन और रोजगार की भी हैं संभावनाएं
प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर नंदनवारा जलाशय पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। चारों ओर पहाड़ियों और हरियाली से घिरे इस क्षेत्र को पिकनिक स्थल, बोटिंग क्लब और अन्य पर्यटन सुविधाओं के रूप में विकसित किया जा सकता है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। ग्रामीणों का मानना है कि ऐतिहासिक धरोहर और जल संसाधन को सुरक्षित रखते हुए क्षेत्र को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

जांच और संरक्षण की मांग
नंदनवारा जलाशय को लेकर ग्रामीणों ने खनन और ब्लास्टिंग से होने वाले संभावित नुकसान की जांच की मांग उठाई है। अब जरूरी है कि संबंधित प्रशासन और खनन विभाग मौके का निरीक्षण कर बांध, पहाड़ी और शिव मंदिर की सुरक्षा का तकनीकी आकलन कराएं। जांच के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाने से ऐतिहासिक धरोहर के साथ-साथ आसपास के गांवों की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

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