Nigam Mandal Suchi: मध्य प्रदेश भाजपा में लंबे समय से जारी खींचतान अब शांत होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की जोड़ी ने सत्ता और संगठन के बीच एक ऐसा सेतु तैयार किया है, जिसमें पुराने दिग्गजों को हाशिए से उठाकर फिर मुख्यधारा में लाया जा रहा है। इस नई रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण जयभान सिंह पवैया की वापसी है, जिन्हें वित्त आयोग की कमान सौंपकर भाजपा ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं।
गुटबाजी के अंत का संकेत?
एक समय में सांगठनिक समीकरणों के चलते शांत नजर आ रहे जयभान सिंह पवैया को बड़ी जिम्मेदारी देना यह दर्शाता है कि अब पार्टी में अनुभव को तवज्जो दी जा रही है। खास बात यह है कि हाल ही में हुई नियुक्तियों डॉ. कैलाश जाटव, रामलाल रौतेल, केशव सिंह बघेल, अशोक जादौन को लेकर किसी भी गुट ने श्रेय लेने की राजनीति नहीं की, जो संगठन की एकजुटता का प्रमाण है।
अगली सूची के संभावित चेहरे
सूत्रों की मानें तो निगम-मंडलों और प्राधिकरणों की दूसरी बड़ी सूची पर मंथन अंतिम दौर में है। पार्टी नेतृत्व ने नेताओं के ट्रैक रिकॉर्ड और 2028 के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए एक पैनल तैयार किया है।
चर्चा में शामिल ये नाम
केशव भदौरिया
अजय सिंह
संजय तीर्थानी
मनोहर पोरवाल
गोविंद काकड़
प्रवीण सोनी
पंचूलाल प्रजापति
रवि सोलंकी
मुकेश यादव
रवि वर्मा
राममोहन बघेल
साधना स्थापक
समीक्षा गुप्ता
सोनम निनामा
अर्चना गुप्ता
मोनिका वट्टी
सीमा सिंह का नाम शामिल बताया जा रहा है।
2028 की तैयारी
भाजपा की इस कवायद के पीछे बड़ा राजनीतिक गणित है। पार्टी चाहती है कि अनुभवी नेताओं के मार्गदर्शन के साथ नए चेहरों की ऊर्जा को जोड़ा जाए। नियुक्तियों का यह दौर न केवल असंतोष को खत्म करने का जरिया है, बल्कि क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधकर आगामी विधानसभा चुनाव 2028 के लिए एक अभेद्य किला तैयार करने की कोशिश भी है।







