MP Rajya Sabha Candidates: मध्य प्रदेश में आगामी जून के महीने में होने जा रहे राज्यसभा की तीन सीटों के चुनाव को लेकर राजनैतिक पारा पूरी तरह गरमा गया है। इन सीटों पर अपनी मुहर लगाने और उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व आज दिल्ली में एक अहम बैठक करने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी दिल्ली के दौरे पर हैं, जहां वे केंद्रीय चुनाव समिति और शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकर नामों को अंतिम रूप देंगे।
सुमेर सिंह और जॉर्ज कुरियन को मौका?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भोपाल में मध्यप्रदेश सरकार और भाजपा संगठन के बीच कई दौर की मैराथन बैठकें पहले ही हो चुकी हैं। प्रदेश संगठन की ओर से संभावित दावेदारों के नामों का एक पैनल दिल्ली हाईकमान को भेजा जा चुका है। कयासों का दौर है कि क्या वर्तमान राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी और केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन को फिर से रिपीट किया जाए, या फिर आगामी समीकरणों को देखते हुए इस बार नए चेहरों को सदन में भेजा जाए। इसी गुणा-भाग को लेकर बीते मंगलवार को भी सीएम मोहन यादव ने बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व से लंबी चर्चा की थी।
दांव पर सीएम मोहन की प्रतिष्ठा
इस पूरे राज्यसभा चुनाव में भाजपा की असली नजर उस तीसरी सीट पर टिकी है, जो संख्या बल के लिहाज से तकनीकी रूप से कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है। सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री मोहन यादव इस तीसरी सीट पर घेराबंदी कर लोहा मनवाना चाहते हैं। वे केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपना कद और मजबूत करने के लिए इस सीट पर ऑपरेशन लोटस या किसी बड़े उलटफेर की पटकथा लिख रहे हैं। यही वजह है कि भाजपा तीसरे उम्मीदवार के नाम पर सबसे ज्यादा गोपनीय मंथन कर रही है। सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस की इस सीट को झटकने के लिए भाजपा किसी सामान्य वर्ग के कद्दावर नेता को मैदान में उतारने की तैयारी में है।
डर के साये में कांग्रेस
वही दूसरी तरफ, भाजपा की तैयारियां और गुप्त बैठकों ने कांग्रेस खेमे की नींद उड़ा दी है। विधानसभा में अपने विधायकों के कम होते आंकड़ों और क्रास वोटिंग के पुराने अनुभवों को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान अब तक अपने उम्मीदवार का नाम घोषित करने का साहस नहीं दिखा पा रहा है। राजनैतिक जानकारों का कहना है कि दिल्ली में आज होने वाली भाजपा की अंतिम बैठक के बाद जैसे ही नामों का ऐलान होगा, मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर विधायकों की बाड़ेबंदी और रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का दौर शुरू हो सकता है।







