भोपाल। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने संविदा कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि नियुक्ति अनुबंध में तबादले का कोई प्रावधान नहीं है, तो सेवा अवधि के दौरान किसी भी संविदा कर्मचारी का ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। जबलपुर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इस मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए संबंधित कर्मचारियों के ट्रांसफर आदेश निरस्त कर दिए।
सरकार का तर्क कोर्ट ने किया खारिज
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने वर्ष 2020 के एक सर्कुलर का हवाला देकर ट्रांसफर को सही ठहराने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि संविदा नियुक्ति स्थायी सरकारी नौकरी से अलग होती है। ऐसे कर्मचारियों की सेवा शर्तें उनके अनुबंध के आधार पर तय होती हैं। यदि अनुबंध में तबादले की शर्त नहीं है, तो बीच कार्यकाल में ट्रांसफर करना नियमों के खिलाफ माना जाएगा।
नए अनुबंध में सरकार जोड़ सकती है ट्रांसफर की शर्त
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में सरकार नए या नवीनीकृत अनुबंधों में ट्रांसफर की शर्त शामिल कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान अनुबंध समाप्त होने के बाद सरकार नई सेवा शर्तें तय करने के लिए स्वतंत्र होगी। हालांकि यह प्रावधान केवल भविष्य के अनुबंधों पर लागू होगा।
कर्मचारी संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
संविदा कर्मचारी संगठनों ने हाईकोर्ट के फैसले को कर्मचारियों के हित में बताया है। संगठनों का कहना है कि कम वेतन और सीमित सुविधाओं के कारण ट्रांसफर होने पर कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। कर्मचारी नेताओं ने सरकार से संविदा कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भविष्य में ट्रांसफर की शर्त लागू की जाती है तो कर्मचारियों को मकान भत्ता और अन्य सुविधाएं भी दी जानी चाहिए।
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