MP Rajya Sabha: मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव का बिगुल बजते ही दोनों ही दलों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर मैराथन बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। इसी गहमा-गहमी के बीच, कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ अचानक देश की राजधानी दिल्ली पहुंचे हैं। दिल्ली पहुंचते ही उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित पार्टी के कई बड़े नेताओं से बंद कमरे में बैठक की है।
नाथ का टिकट फायनल!
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश की सियासत में अटकलें तेज हो गई हैं कि कांग्रेस अपनी एकमात्र सुरक्षित सीट को बचाने और विधायकों में मची अंदरूनी खींचतान को शांत करने के लिए कमलनाथ को ही अपना मुख्य चेहरा बनाकर संसद भेज सकती है।
कमलनाथ ही क्यों?
राजनैतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में मध्य प्रदेश कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को एकजुट रखने की है। कांग्रेस आलाकमान का एक बड़ा धड़ा यह मानता है कि यदि कमलनाथ जैसा दिग्गज नेता खुद चुनावी मैदान में उतरता है, तो सूबे के सभी कांग्रेस विधायकों में एकजुटता बनी रहेगी। इतना ही नही कमलनाथ की अपनी ही पार्टी के विधायकों पर मजबूत पकड़ के चलते BJP के लिए क्रॉस वोटिंग कराना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। इसी सुरक्षा कवच के फॉर्मूले पर खरगे और कमलनाथ के बीच लंबी चर्चा हुई है।
18 जून को डाले जाएंगे वोट
चुनाव आयोग द्वारा मध्य प्रदेश की इन तीन राज्यसभा सीटों के लिए आधिकारिक चुनावी शेड्यूल की तारीखें भी साफ कर दी गई हैं। राज्यसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी 8 जून 2026 तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। तो वही सीटों के लिए 18 जून को सुबह से मतदान होगा और उसी दिन शाम तक चुनावी नतीजे भी स्पष्ट हो जाएंगे।
सस्पेंस बरकरार, जल्द होगा ऐलान
दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ हुई इस बैठक में मध्य प्रदेश के राजनैतिक समीकरणों, जातीय संतुलन और जमीनी फीडबैक पर विचार-विमर्श किया गया है। सूत्रों का दावा है कि कमलनाथ ने खुद चुनाव लड़ने को लेकर गेंद केंद्रीय नेतृत्व के पाले में डाल दी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि 8 जून से पहले दिल्ली आलाकमान कमलनाथ के नाम पर अंतिम मुहर लगाता है या फिर सूबे की राजनीति में किसी नए चेहरे को मौका देकर सबको चौंकाता है।







